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बुधवार, 28 जनवरी 2026

✍️ दिलीप कुमार उदय – ब्लॉग 36  

दिनांक: 28 जनवरी 2026

UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026

कानून क्या कहता है, और सोशल मीडिया क्या समझ रहा है

पिछले कुछ समय से उच्च शिक्षा से जुड़े एक विषय पर लगातार चर्चाएँ सामने आ रही हैं।
UGC द्वारा अधिसूचित Equity Regulations को लेकर कहीं इन्हें “नया कानून” बताया जा रहा है,
तो कहीं यह धारणा बनाई जा रही है कि ये नियम किसी एक वर्ग को निशाना बनाते हैं
या इनका दुरुपयोग बड़े पैमाने पर हो सकता है।

लेकिन किसी भी कानूनी प्रावधान को समझने का सही तरीका
सोशल मीडिया की बहस नहीं, बल्कि उसका मूल पाठ, उसकी भाषा
और उसकी प्रक्रिया होती है।
इसी दृष्टि से यह लेख यह समझने का प्रयास करता है कि
UGC के ये Regulations वास्तव में क्या कहते हैं
और उनके बारे में बनाई जा रही धारणाएँ कितनी ठोस हैं।


यह Act नहीं है, Regulation है — यह फर्क समझना ज़रूरी है

सबसे पहले यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि
UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026
कोई संसद में पारित नया कानून (Act) नहीं हैं।

ये नियम University Grants Commission (UGC) द्वारा
UGC Act, 1956 के अंतर्गत प्रदत्त वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए बनाए गए हैं।
कानूनी दृष्टि से इन्हें Subordinate / Delegated Legislation कहा जाता है।

हालाँकि ये संसद द्वारा बनाए गए अधिनियम नहीं हैं,
लेकिन भारत सरकार के राजपत्र (Gazette of India) में
13 जनवरी 2026 को अधिसूचित होने के बाद
ये सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों पर बाध्यकारी हो जाते हैं।

यहीं से पहला भ्रम जन्म लेता है—
Regulation को Act मान लेना।


इन Regulations की मूल भावना

इन Regulations की मूल सोच यह है कि
उच्च शिक्षण संस्थान केवल डिग्री बाँटने की जगह न होकर
समान अवसर और गरिमा के केंद्र हों।

इसीलिए यह स्पष्ट किया गया है कि
विश्वविद्यालयों में किसी भी छात्र, शोधार्थी या कर्मचारी के साथ
जाति, धर्म, लिंग, क्षेत्र, सामाजिक पृष्ठभूमि या दिव्यांगता
के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

यह सोच नई नहीं है।
यह सीधे-सीधे भारतीय संविधान के
अनुच्छेद 14, 15 और 21
— समानता, भेदभाव से संरक्षण और गरिमा के साथ जीवन —
से प्रेरित है।


“जाति, धर्म, लिंग, क्षेत्र, सामाजिक पृष्ठभूमि या दिव्यांगता” का वास्तविक अर्थ

(SC/ST/OBC बनाम GEN की धारणा पर स्पष्टता)

जब इन Regulations में भेदभाव के आधार के रूप में
जाति, धर्म, लिंग, क्षेत्र, सामाजिक पृष्ठभूमि या दिव्यांगता का उल्लेख किया गया है,
तो इसका आशय केवल एक सीमित सामाजिक बहस से नहीं है।
फिर भी व्यवहार में अक्सर इसे
SC/ST या OBC बनाम General (GEN)
के रूप में प्रस्तुत कर दिया जाता है,
जो Regulations की मूल भावना को अधूरा बना देता है।

जाति (Caste) के संदर्भ में यह समझना ज़रूरी है कि
इन Regulations में SC, ST और OBC
तीनों को एक व्यापक जाति-आधारित समावेशन ढांचे के अंतर्गत देखा गया है।
इसका उद्देश्य किसी वर्ग को विशेषाधिकार देना नहीं,
बल्कि यह स्वीकार करना है कि
उच्च शिक्षा में असमानताएँ
केवल दो श्रेणियों तक सीमित नहीं रहतीं,
और OBC पृष्ठभूमि से आने वाले अनेक विद्यार्थी व कर्मचारी भी
संरचनात्मक कठिनाइयों का सामना करते रहे हैं।

धर्म (Religion) के आधार पर भेदभाव का आशय
किसी धर्म को बढ़ावा देना या किसी को हाशिये पर रखना नहीं है।
यह केवल यह सुनिश्चित करता है कि
किसी भी व्यक्ति के साथ
उसकी आस्था या विश्वास के कारण
अलग या पक्षपातपूर्ण व्यवहार न हो।

लिंग (Gender) की अवधारणा
केवल पुरुष और महिला तक सीमित नहीं है।
इसमें महिलाओं के साथ होने वाला संस्थागत पक्षपात,
तृतीय लिंग व्यक्तियों की उपेक्षा
और लैंगिक पहचान के आधार पर
अवसरों से वंचित किया जाना भी शामिल है।
इस दृष्टि से ये Regulations
सभी श्रेणियों की महिलाओं को
समान रूप से संरक्षण प्रदान करते हैं।

क्षेत्र (Region / Place of Origin) का अर्थ है कि
किसी छात्र या कर्मचारी के साथ
उसके गाँव, कस्बे, राज्य, भाषा
या “स्थानीय–बाहरी” पहचान के कारण
भेदभाव न किया जाए।

सामाजिक पृष्ठभूमि (Social Background)
एक व्यापक अवधारणा है।
इसमें आर्थिक स्थिति, पारिवारिक परिवेश,
पहली पीढ़ी का शिक्षार्थी होना
या संसाधनों और मार्गदर्शन की कमी
जैसी परिस्थितियाँ शामिल होती हैं,
जिनके आधार पर किसी व्यक्ति को
कम सक्षम मान लिया जाता है।

दिव्यांगता (Disability / Divyangta)
केवल शारीरिक अक्षमता तक सीमित नहीं है।
इसमें दृष्टि, श्रवण, बौद्धिक
और अन्य प्रकार की अक्षमताएँ भी आती हैं,
जहाँ व्यक्ति को
अपनी क्षमता के बावजूद
केवल दिव्यांगता के कारण
अलग या कमतर व्यवहार का सामना करना पड़ता है।

General (GEN) श्रेणी: इस समावेशी ढांचे का ही हिस्सा

इन Regulations में General (GEN) श्रेणी को
न तो बाहर रखा गया है
और न ही उन्हें स्वतः किसी प्रकार से
“आरोपी” या “दोषी” मान लिया गया है।

भेदभाव-निरोध का यह सिद्धांत
सभी पर समान रूप से लागू होता है
चाहे व्यक्ति SC, ST, OBC से आता हो या GEN से।
यदि किसी परिस्थिति में
General श्रेणी से आने वाले किसी छात्र या कर्मचारी के साथ भी
अनुचित, पक्षपातपूर्ण या अपमानजनक व्यवहार होता है,
तो वह भी इसी समावेशी व्यवस्था के अंतर्गत
अपनी बात रखने का अधिकार रखता है।

इन Regulations का उद्देश्य
किसी एक वर्ग को “victim”
और किसी दूसरे वर्ग को “आरोपी” के रूप में स्थापित करना नहीं है,
बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि
उच्च शिक्षा संस्थानों में
हर व्यक्ति — किसी भी श्रेणी से हो —
सम्मान, समान अवसर और गरिमा के साथ व्यवहार पाए।


Equal Opportunity Centre और Equity Committee की भूमिका

इन Regulations का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि
हर उच्च शिक्षण संस्थान में
Equal Opportunity Centre (EOC) की स्थापना अनिवार्य की गई है।

EOC के अंतर्गत गठित Equity Committee में
SC, ST, OBC, महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य रखा गया है,
ताकि निर्णय-प्रक्रिया
एकतरफ़ा नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व-आधारित और संतुलित बनी रहे।


शिकायत की प्रक्रिया, दुरुपयोग की आशंका और safeguards

यह आशंका व्यक्त की जाती है कि
ऐसी व्यवस्थाओं का दुरुपयोग हो सकता है।
लेकिन कानून और नियम
आशंकाओं पर नहीं, बल्कि तथ्यों और प्रक्रिया पर कार्य करते हैं।

शिकायत दर्ज होने के बाद
जांच, सुनवाई और आवश्यक कार्रवाई की
एक संरचित प्रक्रिया अपनाई जाती है।
यदि किसी मामले में यह पाया जाता है कि
शिकायत दुर्भावनापूर्ण या झूठी है,
तो उसके समाधान और दंड के लिए
अनुशासनात्मक नियम, दंडात्मक कानून
और न्यायिक उपाय पहले से मौजूद हैं।

कानून का उद्देश्य भय पैदा करना नहीं,
बल्कि संतुलन बनाए रखना है।


Appeal और Safeguards

इन Regulations में यह भी स्पष्ट किया गया है कि
यदि कोई पक्ष समिति के निष्कर्ष से असहमत हो,
तो उसके पास अपील का अधिकार उपलब्ध है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि
निर्णय अंतिम और एकतरफ़ा न होकर
जांच-योग्य और समीक्षा-योग्य बने रहें।


सोशल मीडिया के दावे और वास्तविक पाठ

समस्या तब पैदा होती है जब
Regulations को पूरा पढ़े बिना
उन पर आधारित निष्कर्ष निकाल लिए जाते हैं।

Regulation को Act बता देना,
प्रक्रिया को भय के रूप में प्रस्तुत करना
या समता की अवधारणा को
किसी एक वर्ग के खिलाफ खड़ा कर देना —
ये सभी बातें
मूल Gazette पाठ से मेल नहीं खातीं।


निष्कर्ष: डर नहीं, समझ की ज़रूरत

किसी भी कानून या Regulation का मूल्यांकन
उसकी मंशा, भाषा और प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए,
न कि अधूरी जानकारी और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के आधार पर।

UGC के Equity Regulations, 2026
यह याद दिलाते हैं कि
उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं,
बल्कि समानता और सम्मान का वातावरण बनाना भी है।

कानून यहाँ डर पैदा करने के लिए नहीं,
बल्कि जिम्मेदारी और संतुलन तय करने के लिए है।

✍️ दिलीप कुमार उदय – ब्लॉग 36  

लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं।  

यह लेख सामान्य जन-जागरूकता एवं कानूनी साक्षरता हेतु है,  

न कि किसी विशिष्ट मामले में कानूनी सलाह।

— Adv. Dilip Kumar Udai  

(Bachelor of Journalism & LL.B.)

Blog: https://dilipudai.blogspot.com/  

Instagram (Advocate): https://www.instagram.com/dilipudai.adv/


शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2025

✍️ दिलीप कुमार उदय - ब्लॉग 35 

17  फरवरी 2025 

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ के बाद जागी सरकार

 नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर CRPF की तैनाती  एवं

 26 फरवरी तक काउंटर प्लेटफार्म टिकट बंद होगा 

 60 स्टेशनों पर भीड़ कंट्रोल के लिए होल्डिंग क्षेत्र विकसित किये जायेंगे 

घटना से सबक लेते हुए रेलवे स्टेशन पर भीड़ नियंत्रण को लेकर किये जायेंगे कड़े सुरक्षा इंतजाम चूँकि देश में जब कोई बड़ी घटना घटित होती हे तभी सरकार प्रशासन से करवाती हे नए सिरे से कड़े सुरक्षा इंतजाम!

शनिवार रात को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में 18 लोगों की दर्दनाक मौत  जिसमें पांच मासूम बच्चे भी शामिल थे एवं 13 लोगो के घायल होने की खबरे प्रकाशित हुई है,  यह हादसा तब हुआ जब बड़ी संख्या में यात्री प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले में जाने के लिए ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन पर एकत्रित हुए थे। भारी भीड़ और अव्यवस्था के कारण अचानक भगदड़ मच गई, जिससे कई लोगों की जान चली गई और अनेक यात्री घायल हो गए। भगदड़ मचने के कारण को  लेकर अलग अलग सरकारी दावे किये गए  हे - केंद्र सरकार , रेलवे एवं पुलिस तीनो ने भगदड होने के अलग -अलग बयान  क्रमशः फेक न्यूज़ से भगदड़ मची , फुटओवर ब्रिज से एक व्यक्ति के फिसलने से भगदड़, एक जैसे नाम वाली ट्रेन से भृमित

जो भी कारण रहे सरकार हमेशा की तरह घटना की उच्च स्तरीय जाँच करेगी और जाँच पता नहीं कब तक आएगी!

तकनीकी द्वारा चंद मिनटों में महाकुम्भ में आये करोडो लोगो की गिनती करने का दमखम रखने वाली सरकारो ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भीड़ के दवाब की गिनती करने में नकारा साबित हुई है यदि गिनती कर ली जाती तो शायद घटना को टाला जा सकता था अत्याधिक भीड़ को नियंत्रित करने का इंतजाम हो जाता पर क्या करे आदत से मजबूर है कोई घटना घटने के बाद ही बेहतर इंतजाम करने की लत पड़ी  हुई है।

सरकार द्वारा आमजन की सुरक्षा को लेकर क्यों किया जा रहा हे बार बार खिलवाड़ जो इस त्रासदी का शिकार होकर दिवंगत एवं घायल हो चुके हे उनके आश्रित परिवार वालो को सरकार कुछ चंद रुपयों की मरहम देकर इतिश्री कर लेगी और कहेगी जाँच जारी है दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी!

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया है। 

सत्ता और विपक्ष ने इस घटना पर शोक जताया और मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं है। 

उक्त घटना को लेकर विपक्ष सत्ता पक्ष को घेरने का कार्य निभाकर अपना कर्त्यव्य निभा लेगा और सत्ता पक्ष उनके यानि विपक्ष के तात्कालीन कार्यकाल की घटनाओ को याद दिलाकर अपना  कर्त्यव्य निभा लेगा दोनों अपने अपने कार्यकाल की विफलताओं को दबाकर सफलताओ का गुणगान करके मुख़्यधारा के मीडिया में तर्क वितर्क करके अपनी -अपनी पार्टियो के प्रवक्ता उन तर्क वितर्क के कुछ अंश को सोशल मीडिया प्लेटफार्म मुताबिक कंटेंट बनाकर एक राजनीतिक पार्टी  इस नाकामी पर धुआधार जवाब तलब करके ओर दूसरी पार्टी ओर उसके अनुयायी इस घटनाक्रम का बचाव करके अपने अपने प्रशंषको द्वारा लाइक और शेयर वाला यह कंटेंट सोशल मीडिया के बाजार पर वायरल करके एक दूसरे को लताड़ कर अपनी अपनी पार्टी में खुद का नंबर बढ़ाने का जतन करेंगे कुछ दिनों बाद यह मामला ठंडा पड़ जायेगा और जनता के सामने ऐसी तस्वीर पेश कर दी जायेगी की कुछ हुवा ही नहीं यह तो सामन्य घटना थी सरकार क्या करे इतनी भीड़ थी! या फिर किसी राजनीतिक नफा नुकसान के मुताबिक इस घटनाक्रम का    ठीकरा.................पता नही किस पर फोड़ दिया जायेगा!

सत्ता पक्ष के प्रशंषको का कुम्भ में हुई त्रासदी और हाल ही में हुई नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ वाली त्रासदी को लेकर उनका जवाब सामन्यतः यही रहेगा की क्या करे भीड़ ही इतनी हे सरकार कैसे क्या करेगी!

जब प्रशंशा करनी हो तो वर्तमान सत्ता पक्ष जैसी कोई सरकार नहीं कितने बेहतरार इंतजाम किया हे करोडो लोगो के लिए!!

जब त्रासदी हो जाती हे तो कहा जाता हे की सरकार क्या करे इतनी भीड़ को कैसे करे मैनेज!

वैसे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भीड़ का दवाब बढ़ रहा था तब व्यवस्था देखने वाला तंत्र किसके आदेश का इंतेजार कर रहा था कि व्यवस्था दुरस्त करनी है या नही यह एक बड़ा ही अहम सवाल है???

जब प्रशंसा करनी हो तो सरकार में कितनी इच्छा शक्ति दमखम हे और जब नाकामी हो तो सरकार क्या करे कैसे करे ..........आदि आदि यह दोहरापन वाला व्यवहार स्वच्छ आलोचना भी नहीं करने देता यदि कोई स्वच्छ रूप से किसी घटनाक्रम पर सवाल या आलोचना कर भी देगा तो उसे धर्मविरोधी , देशविरोधी करार कर दिया जायेगा !

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई यह घटना  एक महत्वपूर्ण सबक सिखाती है कि भीड़ नियंत्रण और यात्री सुरक्षा की ओर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रशासन और रेलवे को मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी को टाला जा सके। 

वैसे ध्यान आकर्षित करने का प्रथम जिम्मा मीडिया का होता ही है परन्तु  पिछले कई सालो से मुख्यधारा के मीडिया ने ध्यान आकर्षित करने  वाला कार्य  काफी कम कर दिया है, सरकार से सवाल पूछने की प्रवृति भारतीय मुख्यधारा के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विलुप्त होने जैसा आभास कराती है, साथ ही मीडिया द्वारा विभिन समस्याओं के पहलुओं ओर घटनाक्रम पर पक्ष -विपक्ष के तर्क वितर्क में यह मीडिया सत्ता पक्ष के समक्ष खड़े होने की प्रवृति का आभास भी करा रहा है, जिससे सरकार की नाकामियां जनता के समक्ष पूर्ण रूप से नहीं आ पा रही है!

खेर.....

इस त्रासदी में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए हम उम्मीद करते हैं कि सरकार इस विषय पर जल्द से जल्द आवश्यक एवं ओर बेहत्तर कदम उठाएगी।

लेख सामग्री में विचार मेरे निजी है।

धन्यवाद।

 🙏🙏

 Dilip Kumar Udai

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बुधवार, 21 अगस्त 2024

#The Udai News -34

21 अगस्त 2024

✍️ दिलीप कुमार उदय

धार्मिक एवं पर्यटन स्थल पुष्कर में भारत बंद का दिखा सफल असर

आरक्षण में उप-वर्गीकरण के फैसले के खिलाफ दलित वर्ग का विरोध

पुष्कर में एससी एसटी आरक्षण में उप -वर्गीकरण फैसले के विरुद्ध पुष्कर के दलित वर्ग के कांग्रेस एवं भाजपा पार्टी के सभी नेतागण, सामजिक कार्यकर्ता  एवं पुष्कर के दलित समाज द्वारा अंबेडकर सर्किल पुष्कर से उपखण्ड कार्यालय पुष्कर तक नीले झंडे लेकर शांतिपूर्वक जुलुस निकालकर दलित वर्ग ने राष्ट्रपति के नाम उपखण्ड अधिकारी निखिल कुमार को ज्ञापन सौंपा।

पुष्कर में सुरक्षा की दृष्टि के मद्देनजर पुलिस बल साथ में रहा तैनाता।

व्यपारियों ने स्वैच्छा से तय समय तक बंद रखे अपने प्रतिष्टान।

शांतिपूर्वक भारत बंद का सफल असर दिखा पुष्कर में।

आखिर क्या हे मामला इस पर एक नजर :-

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी कोटे के भीतर नए कोटे की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट के 6:1 बहुमत के फैसले ने ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य के 2004 के फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि आरक्षण के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों का उप-वर्गीकरण नहीं किया जा सकता है, सुप्रीम कोर्ट ने एक अगस्त को एक फैसला सुनाया जिसमे कहा गया की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में उप-वर्गीकरण या सब-क्लासिफिकेशन  किया जा सकता है

उक्त फैसले के बाद समर्थन के साथ विरोध के स्वर भी देखे गए...

विरोध के कारण दलित समुदाय द्वारा भारत बंद का 21 अगस्त  2024  को आह्वान किया गया, इस बंद के क्या परिणाम आएंगे सरकार की इस पर क्या रुपरेखा रहेगी अभी स्पष्ट होना बाकी है। 

यह फेसला दलित और आदिवासी वर्ग में राजनीतिक फूट पैदा करेगा यह आरक्षण के मूल सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है ऐसा आलोचकों का कहना है।

एक अहम एवं विधारणीय मुद्दा जो बनने वाला है कि इस वर्गीकरण को यदि लागू किया जाता हे तो कैसे किया जाएगा?

 कोर्ट ने कहा है कि ये उप -वर्गीकरण आंकड़ों के आधार पर होगा पर इस पर ज़्यादा विवरण नहीं दिया गया है... 

वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर ने कोर्ट के फ़ैसले की आलोचना करते हुए कहा, “कोर्ट ने ये नहीं बताया है कि किस आधार पर पिछड़ापन तय किया जाएगा.”

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहां की आरक्षण को जिस तरीके से बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने जो प्रावधान बनाए हैं वही प्रावधान वैसे ही लागू रहेंगे।

उन्होंने कहा कि जब तक समाज में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के खिलाफ छुआछूत जैसी प्रथा है तब तक एससी/एसटी श्रेणियों को सब-कैटेगरी में आरक्षण और क्रीमीलेयर जैसे प्रावधान नहीं होने देंगे।

अरविंद कुमार - असिस्टेंट प्रोफेसर यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन (पॉलिटिकल साइंटिस्ट) उन्होंने इस फ़ैसले का विरोध करते हुए कहाँ  “सरकारें अपने समर्थकों और विरोधियों के हिसाब से जाति को चुन सकती हैं. इससे द्वेष बढ़ सकता है, जैसा हमने मणिपुर में देखा.” (स्रोत्र बीबीसी न्यूज़)

कोर्ट ने आरक्षण की कुछ नीतियों को पूर्व में कई मुद्दों पर खारिज भी किया  हैं. 

ओबीसी रिजर्वेशन में उप-वर्गीकरण, सरकारी नौकरी में पदोन्नति में आरक्षण,  स्थानीय निकाय चुनाव में औबीसी रिजर्वेशन आदि पहले ऐसा कई बार हुआ है कि कोर्ट ने पर्याप्त आंकड़ा न होने का हवाला देते हुए सरकार द्वारा पारित आरक्षण को नकारा भी है।

आंकड़ों को इकट्ठा करने में भी वक़्त लग सकता है. जैसे, ओबीसी आरक्षण में वर्गीकरण के लिए भाजपा सरकार ने 2017 में जस्टिस रोहिणी कमेटी का गठन किया था, जिनकी रिपोर्ट 2023 में पूरी हुई. पर ये रिपोर्ट अब ठंडे बस्ते में है।

लेख सामग्री में विचार मेरे निजी है।

धन्यवाद।

 🙏🙏

 Dilip Kumar Udai

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शनिवार, 22 जून 2024

#TheUdai News - 33   

22 जून - 2024 
✍दिलीप कुमार उदय

''पुष्कर कॉरिडोर" बनाम
पुष्कर की मुख्य समस्याए एवं आवश्यकताएं

तीर्थ नगरी पुष्कर के विकास एवं सौंदर्यकरण के नाम पर प्रस्तावित पुष्कर कॉरिडोर एवं पाथवे बनाने की कवायद शुरू होते ही यह विवाद एवं विरोध की भेट चढ़ गया है।

अयोध्या, काशी और उज्जैन की तर्ज पर कॉरिडोर बनाने हेतु, वहाँ पर हुईं तोड़फोड़ को देखते हुए पुष्कर वासियो को भी डर सताने लगा है की यदि तोड़फोड़ हुई तो हमारे घर और व्यवसायिक प्रतिष्ठानो पर भी आंच गिरेगी इसलिए इस प्रस्तावित कॉरिडोर का जमकर विरोध किया जा रहा है।

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में 
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है।....... राहत इन्दोरी की यह शायरी तो आपने सुनी ही होगी।

हाल ही में हुए लोकसभा चुनावो में यूपी के अयोध्या मंडल में  भाजपा की हार और इंडिया की जीत के बाद से ही अयोध्या के निवासियों को सोशल मीडिया पर एक पार्टी विशेष समर्थक लोगो द्वारा जमकर ट्रोल किया गया उनका बहिष्कार, आलोचना करते हुए उन्हें गद्दार करार देते हुए गालियां तक दी गई... गौरतलब यह है कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के उपरान्त भाजपा को यहाँ से प्रचंड जीत मिलने की पूरी उम्मीद थी परन्तु अयोध्या की जनता ने भाजपा की उम्मीदो पर पानी फेर दिया।

सोशल मीडिया पर अयोध्यावासियो को ट्रोल करने वाले लोगो की जमात में शामिल लोगो को पुष्कर कॉरिडोर को लेकर उत्पन्न हुए विरोध से शायद समझ आ गया होगा या आ जायेगा की बुनियादी जरूरतो को कुचल कर धर्म की राजनीति नहीं चल सकती।  इसलिए बिना सोचे समझे किसी को भी ट्रोल न करे धर्म एवं आस्था व्यक्ति का व्यक्तिगत विषय होता है।

भव्य कॉरिडोर बनाने के साथ -साथ यहाँ के नगरवासियों की जिंदगी को भी भव्य बनाने के प्रयास होने चाहिए, करोड़ो रूपये के कॉरिडोर से पूर्व कुछ करोड़ का बजट यहाँ की स्थानीय समस्याओं एवं आवश्यकताओं हेतु खर्च होने चाहिये

तीर्थनगरी पुष्कर श्रद्धा, भक्ति,आस्था, आध्यात्मिक एवं पौरोणिकता के स्वरूप से बना हुवा है इसे सिर्फ पर्यटन की दृष्टि से न देखे। विकास सौन्दर्यकरण के नाम पर तीर्थ नगरी के आध्यात्मिक, व्यवसायिक एवं पर्यटन सभी पहलुओं को समझते हुए पुष्कर तीर्थ का प्राचीन स्वरूप सुरक्षित रखते हुए योजनाओं का क्रियान्वयन करने की रूपरेखा तैयार की जाए।

खेर असल मुद्दे की बात यह है कि  पुष्कर कॉरिडोर बनाम पुष्कर की मूल समस्याएं
भव्य कॉरिडोर में करोड़ों रुपये खर्च करने से पहले
पुष्कर की आवश्यकताओं एवं समस्याओ पर खर्च किया जाना चाहिए।  प्रथम दृष्टि में पहले समस्याओ और आवश्यकताओं का निवारण होना चाहिए उसके उपरांत  कॉरिडोर जैसी योजना वो भी पुष्कर के प्राचीन स्वरुप को बरक़रार रखते हुए पुष्कर वासियो को भरोसे में रखते हुये स्थानीय सुझावों को मध्येनजर रखते हुए निर्णय लिया जाकर।

पुष्कर की कुछ मुख्य समस्याओं एवं आवश्यकताओं की सूची निम्न प्रकार से पेश है.....

1.सरोवर में जाने वाले दूषित पानी एवं प्रतिबंध के बावजूद खाद्य सामग्री बेचने वाली समस्या। 
2.पुष्कर में कई स्थानों पर  बरसाती पानी के भराव की समस्या।
3.पब्लिक टॉयलेट की कमी की समस्या।
4.आवारा पशुओं की समस्या।5.साफ-सफाई की समस्या।
6.ऊंचाई वाले बस स्टैंड पर बसों के ठहराव वाली समस्या।
7.प्रमुख मार्गों पर स्थानीय एवं यात्रियों हेतु जो पैदल पाथवे बने हुए है उनपर अतिक्रमण की समस्या।


8.ब्रह्मा मंदिर परिसर की मरम्मत की आवश्यकता।
9.पब्लिक गार्डन की आवश्यकता।
10.खेल मैदान की आवश्यकता।
11.नवीन हॉस्पिटल की आवश्यकता।
12.राजकीय चिकित्सालय के सामने नेहरू उद्यान की दुर्दशा सुधारने की आवश्यकता।

समस्याओ एवं आवश्यकताओं का पिटारा बहुत लंबा बन सकता  है फिलहाल राज्य-केंद्र तक पहुँच रखने वाले स्थानीय नेतागण एवं प्रशासन इन समस्याओं एवं आवश्यकताओं का ही समाधान कर दीजिए, उसके बाद ही कॉरिडोर के बारे में सोचिये।

नगर पालिका, विधायक (केबिनेट मंत्री) , सांसद (केंद्रीय मंत्री)  से लेकर राज्य और केंद्र तक एक ही पार्टी सत्ता की चेन से जुडी हे तो इस चेन का इस्तेमाल करते हुए पुष्कर के हित को देखते हुए विकास की गंगा की धार को तीर्थ नगरी में लेकर आने का सामर्थ्य जुटाए।

धन्यवाद।
 🙏🙏

 Dilip Kumar Udai
(Bachelor of Journalism & LL.B.)

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सोमवार, 30 अक्टूबर 2023

 #TheUdai News - 32   
28 अक्टूबर 2023
✍दिलीप कुमार उदय

 ''विधायकनामा"
पेश हे विधानसभा क्षेत्र - पुष्कर के प्रत्याशी का परिचयनामा - 2 

भाजपा  प्रत्याशी -  सुरेश सिंह रावत ( पूर्व संसदीय सचिव एवं विधायक)

सुरेश सिंह रावत एक राजनीतिज्ञ और राजस्थान विधान सभा के सदस्य हैं जो राजस्थान के पुष्कर विधानसभा क्षेत्र का वर्ष 2013 से प्रतिनिधित्व कर रहे है 

पुष्कर के इतिहास में सर्वाधिक मतों से जीत हासिल करने का रिकॉर्ड इनके नाम दर्ज है, 10 वर्षो के राजनितिक सफर के दौरान राज्य में भाजपा की सत्ता के समय संसदीय सचिव के पद पर भी रहे सुरेश सिंह रावत पुष्कर क्षेत्र में  से भाजपा के बड़े नेता के रूप में भी जाने जाते है 
  
विधानसभा में विरोध के अनूठे प्रयोग करते हुए  लंपी वायरस के मुद्दे पर गाय को लेकर विधानसभा पहुँच थे इसी प्रकार बिजली का प्रतीकात्मक खम्बा एवं बील लेकर  भी  विरोध  दर्ज करवाकर मीडिया  में में चर्चित रहे थे अभी हाल ही में  पुष्कर के एक कपड़ा व्यापारी के द्वारा भाजपा विधायक सुरेश सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाए गए  हैं इस आरोप के कारण मीडिया में  पुनः खासे चर्चित हुए है 

भाजपा के असंतुष्ट कार्यकर्ता  एक बार पुनः तीसरी बार  विधानसभा क्षेत्र - पुष्कर के प्रत्याशी बनाये जाने पर खफा हे कांग्रेस की तरह यहाँ भी असंतुष्ट कार्यकर्ता नाखुश, निराश, हताश और मायुश है  इस वजह से बागी उम्मीदवार या अन्य राजनितिक दांव -पेच में जीत की हैट्रिक में अड़चने रुकावटे पैदा होने के आसार बन सकते है 

राजस्थान विधान सभा सचिवालय, विधानसभा सदन 14  (2013-18) एवं सदन 15 (2018-23) के अनुसार भाजपा  प्रत्याशी का परिचय 

सुरेश सिंह रावत 
पिता का नाम श्री सूरज सिंह रावत
माता का नाम श्रीमती राधा देवी रावत

लिँग पुरुष
जन्म तिथि एवं स्थान 28/3/1980 ग्राम मुहामी, अजमेर
शिक्षा स्‍नातक (बी.ए. (आनर्स)), महर्षि दयानन्‍द सरस्‍वती विश्‍वविद्धालय, अजमेर
जीवनसाथी का नाम श्रीमती रेखा रावत
विवाह की तिथि 29/11/2008
बच्चों की संख्या 2 पुत्र
व्यवसाय कृषि
मोबाइल नंबर 9414006464
सदस्य श्रेणी सामान्य

पद
2013-18 सदस्य, चौदहवीं राजस्थान विधान सभा
2018-23 सदस्य, पंद्रहवीं राजस्थान विधान सभा
02/04/2014-27/05/2016 सदस्य, याचिका समिति, राजस्थान विधान सभा
27/05/2016-01/05/2017 सदस्य, नियम समिति, राजस्थान विधान सभा
18/01/2016 - 17/12/2018 संसदीय सचिव, कार्यकाल, राजस्थान सरकार
सामाजिक पद
अध्यक्ष, तीर्थ गुरु श्री पुष्‍करराज विकास न्‍यास, पुष्‍कर, जिला अजमेर
2000-2002 सदस्य, अखिल भारतीय रावत युवा महासभा, राजस्‍थान
राजनीतिक पद
प्रदेश मंत्री, भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा, राजस्‍थान
प्रदेश महामंत्री, खेल प्रकोष्‍ठ, भारतीय जनता पार्टी, राजस्‍थान
2009-2013 मण्‍डल अध्‍यक्ष, भारतीय जनता पार्टी, श्रीनगर मण्‍डल, जिला अजमेर
अन्य पद
2017 से प्रदेश उपाध्यक्ष, भारत स्‍काउट एवं गाइड, राजस्‍थान
अन्य जानकारी
खेलकूद - क्रिकेट, कब्‍बडी (राष्‍ट्रीय स्‍तर पर)
विदेश यात्रा
गल्‍फ कन्‍ट्रीज (दुबई व 6 अन्‍य देश), हांगकांग, मॉरिशस, सिंगापुर

सम्मान एवं पुरस्कार
रावत रत्‍न, रावत महासभा, राजस्‍थान

स्थायी पता
बाबा फार्म, ग्राम मुहामी, वाया गगवाना, जिला अजमेर

स्थानीय पता
 एफ-19, विधायकपुरी, जयपुर

उपरोक्त उपलब्ध जानकारी अनुसार सावधानी पूर्वक तथ्यो की सामग्री को समावेश करते हुए परिचय को प्रेषित किया गया है यदि फिर भी किसी प्रकार की त्रुटि या जानकारी छूट गई हो तो टीम सुरेश सिंह रावत जानकारी उपलब्ध कराने का कष्ट कर सकते है, ताकि हम अपने ब्लॉग में जानकारी अपडेट कर सके।
धन्यवाद।

 भाजपा  प्रत्याशी -  सुरेश सिंह रावत के राजनितिक सफर में दर्ज हुई  जीत का संक्षिप्त ब्यौरा

सदन सं. 14 (2013-18) कुल प्राप्त मत 90013 निकटतम प्रतिद्धंदी  श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ (मत 48723) अन्तर - 41290  परिणाम -  सुरेश सिंह रावत  की जीत 

सदन सं. 15 (2018-23) कुल प्राप्त मत  84860 निकटतम प्रतिद्धंदी श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ  (मत  75471) अन्तर - 9389 परिणाम - सुरेश सिंह रावत  की जीत 

 Dilip Kumar Udai
(Bachelor of Journalism & LL.B.)

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