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बुधवार, 28 जनवरी 2026

✍️ दिलीप कुमार उदय – ब्लॉग 36  

दिनांक: 28 जनवरी 2026

UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026

कानून क्या कहता है, और सोशल मीडिया क्या समझ रहा है

पिछले कुछ समय से उच्च शिक्षा से जुड़े एक विषय पर लगातार चर्चाएँ सामने आ रही हैं।
UGC द्वारा अधिसूचित Equity Regulations को लेकर कहीं इन्हें “नया कानून” बताया जा रहा है,
तो कहीं यह धारणा बनाई जा रही है कि ये नियम किसी एक वर्ग को निशाना बनाते हैं
या इनका दुरुपयोग बड़े पैमाने पर हो सकता है।

लेकिन किसी भी कानूनी प्रावधान को समझने का सही तरीका
सोशल मीडिया की बहस नहीं, बल्कि उसका मूल पाठ, उसकी भाषा
और उसकी प्रक्रिया होती है।
इसी दृष्टि से यह लेख यह समझने का प्रयास करता है कि
UGC के ये Regulations वास्तव में क्या कहते हैं
और उनके बारे में बनाई जा रही धारणाएँ कितनी ठोस हैं।


यह Act नहीं है, Regulation है — यह फर्क समझना ज़रूरी है

सबसे पहले यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि
UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026
कोई संसद में पारित नया कानून (Act) नहीं हैं।

ये नियम University Grants Commission (UGC) द्वारा
UGC Act, 1956 के अंतर्गत प्रदत्त वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए बनाए गए हैं।
कानूनी दृष्टि से इन्हें Subordinate / Delegated Legislation कहा जाता है।

हालाँकि ये संसद द्वारा बनाए गए अधिनियम नहीं हैं,
लेकिन भारत सरकार के राजपत्र (Gazette of India) में
13 जनवरी 2026 को अधिसूचित होने के बाद
ये सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों पर बाध्यकारी हो जाते हैं।

यहीं से पहला भ्रम जन्म लेता है—
Regulation को Act मान लेना।


इन Regulations की मूल भावना

इन Regulations की मूल सोच यह है कि
उच्च शिक्षण संस्थान केवल डिग्री बाँटने की जगह न होकर
समान अवसर और गरिमा के केंद्र हों।

इसीलिए यह स्पष्ट किया गया है कि
विश्वविद्यालयों में किसी भी छात्र, शोधार्थी या कर्मचारी के साथ
जाति, धर्म, लिंग, क्षेत्र, सामाजिक पृष्ठभूमि या दिव्यांगता
के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

यह सोच नई नहीं है।
यह सीधे-सीधे भारतीय संविधान के
अनुच्छेद 14, 15 और 21
— समानता, भेदभाव से संरक्षण और गरिमा के साथ जीवन —
से प्रेरित है।


“जाति, धर्म, लिंग, क्षेत्र, सामाजिक पृष्ठभूमि या दिव्यांगता” का वास्तविक अर्थ

(SC/ST/OBC बनाम GEN की धारणा पर स्पष्टता)

जब इन Regulations में भेदभाव के आधार के रूप में
जाति, धर्म, लिंग, क्षेत्र, सामाजिक पृष्ठभूमि या दिव्यांगता का उल्लेख किया गया है,
तो इसका आशय केवल एक सीमित सामाजिक बहस से नहीं है।
फिर भी व्यवहार में अक्सर इसे
SC/ST या OBC बनाम General (GEN)
के रूप में प्रस्तुत कर दिया जाता है,
जो Regulations की मूल भावना को अधूरा बना देता है।

जाति (Caste) के संदर्भ में यह समझना ज़रूरी है कि
इन Regulations में SC, ST और OBC
तीनों को एक व्यापक जाति-आधारित समावेशन ढांचे के अंतर्गत देखा गया है।
इसका उद्देश्य किसी वर्ग को विशेषाधिकार देना नहीं,
बल्कि यह स्वीकार करना है कि
उच्च शिक्षा में असमानताएँ
केवल दो श्रेणियों तक सीमित नहीं रहतीं,
और OBC पृष्ठभूमि से आने वाले अनेक विद्यार्थी व कर्मचारी भी
संरचनात्मक कठिनाइयों का सामना करते रहे हैं।

धर्म (Religion) के आधार पर भेदभाव का आशय
किसी धर्म को बढ़ावा देना या किसी को हाशिये पर रखना नहीं है।
यह केवल यह सुनिश्चित करता है कि
किसी भी व्यक्ति के साथ
उसकी आस्था या विश्वास के कारण
अलग या पक्षपातपूर्ण व्यवहार न हो।

लिंग (Gender) की अवधारणा
केवल पुरुष और महिला तक सीमित नहीं है।
इसमें महिलाओं के साथ होने वाला संस्थागत पक्षपात,
तृतीय लिंग व्यक्तियों की उपेक्षा
और लैंगिक पहचान के आधार पर
अवसरों से वंचित किया जाना भी शामिल है।
इस दृष्टि से ये Regulations
सभी श्रेणियों की महिलाओं को
समान रूप से संरक्षण प्रदान करते हैं।

क्षेत्र (Region / Place of Origin) का अर्थ है कि
किसी छात्र या कर्मचारी के साथ
उसके गाँव, कस्बे, राज्य, भाषा
या “स्थानीय–बाहरी” पहचान के कारण
भेदभाव न किया जाए।

सामाजिक पृष्ठभूमि (Social Background)
एक व्यापक अवधारणा है।
इसमें आर्थिक स्थिति, पारिवारिक परिवेश,
पहली पीढ़ी का शिक्षार्थी होना
या संसाधनों और मार्गदर्शन की कमी
जैसी परिस्थितियाँ शामिल होती हैं,
जिनके आधार पर किसी व्यक्ति को
कम सक्षम मान लिया जाता है।

दिव्यांगता (Disability / Divyangta)
केवल शारीरिक अक्षमता तक सीमित नहीं है।
इसमें दृष्टि, श्रवण, बौद्धिक
और अन्य प्रकार की अक्षमताएँ भी आती हैं,
जहाँ व्यक्ति को
अपनी क्षमता के बावजूद
केवल दिव्यांगता के कारण
अलग या कमतर व्यवहार का सामना करना पड़ता है।

General (GEN) श्रेणी: इस समावेशी ढांचे का ही हिस्सा

इन Regulations में General (GEN) श्रेणी को
न तो बाहर रखा गया है
और न ही उन्हें स्वतः किसी प्रकार से
“आरोपी” या “दोषी” मान लिया गया है।

भेदभाव-निरोध का यह सिद्धांत
सभी पर समान रूप से लागू होता है
चाहे व्यक्ति SC, ST, OBC से आता हो या GEN से।
यदि किसी परिस्थिति में
General श्रेणी से आने वाले किसी छात्र या कर्मचारी के साथ भी
अनुचित, पक्षपातपूर्ण या अपमानजनक व्यवहार होता है,
तो वह भी इसी समावेशी व्यवस्था के अंतर्गत
अपनी बात रखने का अधिकार रखता है।

इन Regulations का उद्देश्य
किसी एक वर्ग को “victim”
और किसी दूसरे वर्ग को “आरोपी” के रूप में स्थापित करना नहीं है,
बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि
उच्च शिक्षा संस्थानों में
हर व्यक्ति — किसी भी श्रेणी से हो —
सम्मान, समान अवसर और गरिमा के साथ व्यवहार पाए।


Equal Opportunity Centre और Equity Committee की भूमिका

इन Regulations का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि
हर उच्च शिक्षण संस्थान में
Equal Opportunity Centre (EOC) की स्थापना अनिवार्य की गई है।

EOC के अंतर्गत गठित Equity Committee में
SC, ST, OBC, महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य रखा गया है,
ताकि निर्णय-प्रक्रिया
एकतरफ़ा नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व-आधारित और संतुलित बनी रहे।


शिकायत की प्रक्रिया, दुरुपयोग की आशंका और safeguards

यह आशंका व्यक्त की जाती है कि
ऐसी व्यवस्थाओं का दुरुपयोग हो सकता है।
लेकिन कानून और नियम
आशंकाओं पर नहीं, बल्कि तथ्यों और प्रक्रिया पर कार्य करते हैं।

शिकायत दर्ज होने के बाद
जांच, सुनवाई और आवश्यक कार्रवाई की
एक संरचित प्रक्रिया अपनाई जाती है।
यदि किसी मामले में यह पाया जाता है कि
शिकायत दुर्भावनापूर्ण या झूठी है,
तो उसके समाधान और दंड के लिए
अनुशासनात्मक नियम, दंडात्मक कानून
और न्यायिक उपाय पहले से मौजूद हैं।

कानून का उद्देश्य भय पैदा करना नहीं,
बल्कि संतुलन बनाए रखना है।


Appeal और Safeguards

इन Regulations में यह भी स्पष्ट किया गया है कि
यदि कोई पक्ष समिति के निष्कर्ष से असहमत हो,
तो उसके पास अपील का अधिकार उपलब्ध है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि
निर्णय अंतिम और एकतरफ़ा न होकर
जांच-योग्य और समीक्षा-योग्य बने रहें।


सोशल मीडिया के दावे और वास्तविक पाठ

समस्या तब पैदा होती है जब
Regulations को पूरा पढ़े बिना
उन पर आधारित निष्कर्ष निकाल लिए जाते हैं।

Regulation को Act बता देना,
प्रक्रिया को भय के रूप में प्रस्तुत करना
या समता की अवधारणा को
किसी एक वर्ग के खिलाफ खड़ा कर देना —
ये सभी बातें
मूल Gazette पाठ से मेल नहीं खातीं।


निष्कर्ष: डर नहीं, समझ की ज़रूरत

किसी भी कानून या Regulation का मूल्यांकन
उसकी मंशा, भाषा और प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए,
न कि अधूरी जानकारी और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के आधार पर।

UGC के Equity Regulations, 2026
यह याद दिलाते हैं कि
उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं,
बल्कि समानता और सम्मान का वातावरण बनाना भी है।

कानून यहाँ डर पैदा करने के लिए नहीं,
बल्कि जिम्मेदारी और संतुलन तय करने के लिए है।

✍️ दिलीप कुमार उदय – ब्लॉग 36  

लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं।  

यह लेख सामान्य जन-जागरूकता एवं कानूनी साक्षरता हेतु है,  

न कि किसी विशिष्ट मामले में कानूनी सलाह।

— Adv. Dilip Kumar Udai  

(Bachelor of Journalism & LL.B.)

Blog: https://dilipudai.blogspot.com/  

Instagram (Advocate): https://www.instagram.com/dilipudai.adv/


शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2025

✍️ दिलीप कुमार उदय - ब्लॉग 35 

17  फरवरी 2025 

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ के बाद जागी सरकार

 नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर CRPF की तैनाती  एवं

 26 फरवरी तक काउंटर प्लेटफार्म टिकट बंद होगा 

 60 स्टेशनों पर भीड़ कंट्रोल के लिए होल्डिंग क्षेत्र विकसित किये जायेंगे 

घटना से सबक लेते हुए रेलवे स्टेशन पर भीड़ नियंत्रण को लेकर किये जायेंगे कड़े सुरक्षा इंतजाम चूँकि देश में जब कोई बड़ी घटना घटित होती हे तभी सरकार प्रशासन से करवाती हे नए सिरे से कड़े सुरक्षा इंतजाम!

शनिवार रात को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में 18 लोगों की दर्दनाक मौत  जिसमें पांच मासूम बच्चे भी शामिल थे एवं 13 लोगो के घायल होने की खबरे प्रकाशित हुई है,  यह हादसा तब हुआ जब बड़ी संख्या में यात्री प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले में जाने के लिए ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन पर एकत्रित हुए थे। भारी भीड़ और अव्यवस्था के कारण अचानक भगदड़ मच गई, जिससे कई लोगों की जान चली गई और अनेक यात्री घायल हो गए। भगदड़ मचने के कारण को  लेकर अलग अलग सरकारी दावे किये गए  हे - केंद्र सरकार , रेलवे एवं पुलिस तीनो ने भगदड होने के अलग -अलग बयान  क्रमशः फेक न्यूज़ से भगदड़ मची , फुटओवर ब्रिज से एक व्यक्ति के फिसलने से भगदड़, एक जैसे नाम वाली ट्रेन से भृमित

जो भी कारण रहे सरकार हमेशा की तरह घटना की उच्च स्तरीय जाँच करेगी और जाँच पता नहीं कब तक आएगी!

तकनीकी द्वारा चंद मिनटों में महाकुम्भ में आये करोडो लोगो की गिनती करने का दमखम रखने वाली सरकारो ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भीड़ के दवाब की गिनती करने में नकारा साबित हुई है यदि गिनती कर ली जाती तो शायद घटना को टाला जा सकता था अत्याधिक भीड़ को नियंत्रित करने का इंतजाम हो जाता पर क्या करे आदत से मजबूर है कोई घटना घटने के बाद ही बेहतर इंतजाम करने की लत पड़ी  हुई है।

सरकार द्वारा आमजन की सुरक्षा को लेकर क्यों किया जा रहा हे बार बार खिलवाड़ जो इस त्रासदी का शिकार होकर दिवंगत एवं घायल हो चुके हे उनके आश्रित परिवार वालो को सरकार कुछ चंद रुपयों की मरहम देकर इतिश्री कर लेगी और कहेगी जाँच जारी है दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी!

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया है। 

सत्ता और विपक्ष ने इस घटना पर शोक जताया और मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं है। 

उक्त घटना को लेकर विपक्ष सत्ता पक्ष को घेरने का कार्य निभाकर अपना कर्त्यव्य निभा लेगा और सत्ता पक्ष उनके यानि विपक्ष के तात्कालीन कार्यकाल की घटनाओ को याद दिलाकर अपना  कर्त्यव्य निभा लेगा दोनों अपने अपने कार्यकाल की विफलताओं को दबाकर सफलताओ का गुणगान करके मुख़्यधारा के मीडिया में तर्क वितर्क करके अपनी -अपनी पार्टियो के प्रवक्ता उन तर्क वितर्क के कुछ अंश को सोशल मीडिया प्लेटफार्म मुताबिक कंटेंट बनाकर एक राजनीतिक पार्टी  इस नाकामी पर धुआधार जवाब तलब करके ओर दूसरी पार्टी ओर उसके अनुयायी इस घटनाक्रम का बचाव करके अपने अपने प्रशंषको द्वारा लाइक और शेयर वाला यह कंटेंट सोशल मीडिया के बाजार पर वायरल करके एक दूसरे को लताड़ कर अपनी अपनी पार्टी में खुद का नंबर बढ़ाने का जतन करेंगे कुछ दिनों बाद यह मामला ठंडा पड़ जायेगा और जनता के सामने ऐसी तस्वीर पेश कर दी जायेगी की कुछ हुवा ही नहीं यह तो सामन्य घटना थी सरकार क्या करे इतनी भीड़ थी! या फिर किसी राजनीतिक नफा नुकसान के मुताबिक इस घटनाक्रम का    ठीकरा.................पता नही किस पर फोड़ दिया जायेगा!

सत्ता पक्ष के प्रशंषको का कुम्भ में हुई त्रासदी और हाल ही में हुई नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ वाली त्रासदी को लेकर उनका जवाब सामन्यतः यही रहेगा की क्या करे भीड़ ही इतनी हे सरकार कैसे क्या करेगी!

जब प्रशंशा करनी हो तो वर्तमान सत्ता पक्ष जैसी कोई सरकार नहीं कितने बेहतरार इंतजाम किया हे करोडो लोगो के लिए!!

जब त्रासदी हो जाती हे तो कहा जाता हे की सरकार क्या करे इतनी भीड़ को कैसे करे मैनेज!

वैसे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भीड़ का दवाब बढ़ रहा था तब व्यवस्था देखने वाला तंत्र किसके आदेश का इंतेजार कर रहा था कि व्यवस्था दुरस्त करनी है या नही यह एक बड़ा ही अहम सवाल है???

जब प्रशंसा करनी हो तो सरकार में कितनी इच्छा शक्ति दमखम हे और जब नाकामी हो तो सरकार क्या करे कैसे करे ..........आदि आदि यह दोहरापन वाला व्यवहार स्वच्छ आलोचना भी नहीं करने देता यदि कोई स्वच्छ रूप से किसी घटनाक्रम पर सवाल या आलोचना कर भी देगा तो उसे धर्मविरोधी , देशविरोधी करार कर दिया जायेगा !

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई यह घटना  एक महत्वपूर्ण सबक सिखाती है कि भीड़ नियंत्रण और यात्री सुरक्षा की ओर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रशासन और रेलवे को मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी को टाला जा सके। 

वैसे ध्यान आकर्षित करने का प्रथम जिम्मा मीडिया का होता ही है परन्तु  पिछले कई सालो से मुख्यधारा के मीडिया ने ध्यान आकर्षित करने  वाला कार्य  काफी कम कर दिया है, सरकार से सवाल पूछने की प्रवृति भारतीय मुख्यधारा के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विलुप्त होने जैसा आभास कराती है, साथ ही मीडिया द्वारा विभिन समस्याओं के पहलुओं ओर घटनाक्रम पर पक्ष -विपक्ष के तर्क वितर्क में यह मीडिया सत्ता पक्ष के समक्ष खड़े होने की प्रवृति का आभास भी करा रहा है, जिससे सरकार की नाकामियां जनता के समक्ष पूर्ण रूप से नहीं आ पा रही है!

खेर.....

इस त्रासदी में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए हम उम्मीद करते हैं कि सरकार इस विषय पर जल्द से जल्द आवश्यक एवं ओर बेहत्तर कदम उठाएगी।

लेख सामग्री में विचार मेरे निजी है।

धन्यवाद।

 🙏🙏

 Dilip Kumar Udai

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बुधवार, 21 अगस्त 2024

#The Udai News -34

21 अगस्त 2024

✍️ दिलीप कुमार उदय

धार्मिक एवं पर्यटन स्थल पुष्कर में भारत बंद का दिखा सफल असर

आरक्षण में उप-वर्गीकरण के फैसले के खिलाफ दलित वर्ग का विरोध

पुष्कर में एससी एसटी आरक्षण में उप -वर्गीकरण फैसले के विरुद्ध पुष्कर के दलित वर्ग के कांग्रेस एवं भाजपा पार्टी के सभी नेतागण, सामजिक कार्यकर्ता  एवं पुष्कर के दलित समाज द्वारा अंबेडकर सर्किल पुष्कर से उपखण्ड कार्यालय पुष्कर तक नीले झंडे लेकर शांतिपूर्वक जुलुस निकालकर दलित वर्ग ने राष्ट्रपति के नाम उपखण्ड अधिकारी निखिल कुमार को ज्ञापन सौंपा।

पुष्कर में सुरक्षा की दृष्टि के मद्देनजर पुलिस बल साथ में रहा तैनाता।

व्यपारियों ने स्वैच्छा से तय समय तक बंद रखे अपने प्रतिष्टान।

शांतिपूर्वक भारत बंद का सफल असर दिखा पुष्कर में।

आखिर क्या हे मामला इस पर एक नजर :-

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी कोटे के भीतर नए कोटे की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट के 6:1 बहुमत के फैसले ने ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य के 2004 के फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि आरक्षण के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों का उप-वर्गीकरण नहीं किया जा सकता है, सुप्रीम कोर्ट ने एक अगस्त को एक फैसला सुनाया जिसमे कहा गया की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में उप-वर्गीकरण या सब-क्लासिफिकेशन  किया जा सकता है

उक्त फैसले के बाद समर्थन के साथ विरोध के स्वर भी देखे गए...

विरोध के कारण दलित समुदाय द्वारा भारत बंद का 21 अगस्त  2024  को आह्वान किया गया, इस बंद के क्या परिणाम आएंगे सरकार की इस पर क्या रुपरेखा रहेगी अभी स्पष्ट होना बाकी है। 

यह फेसला दलित और आदिवासी वर्ग में राजनीतिक फूट पैदा करेगा यह आरक्षण के मूल सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है ऐसा आलोचकों का कहना है।

एक अहम एवं विधारणीय मुद्दा जो बनने वाला है कि इस वर्गीकरण को यदि लागू किया जाता हे तो कैसे किया जाएगा?

 कोर्ट ने कहा है कि ये उप -वर्गीकरण आंकड़ों के आधार पर होगा पर इस पर ज़्यादा विवरण नहीं दिया गया है... 

वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर ने कोर्ट के फ़ैसले की आलोचना करते हुए कहा, “कोर्ट ने ये नहीं बताया है कि किस आधार पर पिछड़ापन तय किया जाएगा.”

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहां की आरक्षण को जिस तरीके से बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने जो प्रावधान बनाए हैं वही प्रावधान वैसे ही लागू रहेंगे।

उन्होंने कहा कि जब तक समाज में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के खिलाफ छुआछूत जैसी प्रथा है तब तक एससी/एसटी श्रेणियों को सब-कैटेगरी में आरक्षण और क्रीमीलेयर जैसे प्रावधान नहीं होने देंगे।

अरविंद कुमार - असिस्टेंट प्रोफेसर यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन (पॉलिटिकल साइंटिस्ट) उन्होंने इस फ़ैसले का विरोध करते हुए कहाँ  “सरकारें अपने समर्थकों और विरोधियों के हिसाब से जाति को चुन सकती हैं. इससे द्वेष बढ़ सकता है, जैसा हमने मणिपुर में देखा.” (स्रोत्र बीबीसी न्यूज़)

कोर्ट ने आरक्षण की कुछ नीतियों को पूर्व में कई मुद्दों पर खारिज भी किया  हैं. 

ओबीसी रिजर्वेशन में उप-वर्गीकरण, सरकारी नौकरी में पदोन्नति में आरक्षण,  स्थानीय निकाय चुनाव में औबीसी रिजर्वेशन आदि पहले ऐसा कई बार हुआ है कि कोर्ट ने पर्याप्त आंकड़ा न होने का हवाला देते हुए सरकार द्वारा पारित आरक्षण को नकारा भी है।

आंकड़ों को इकट्ठा करने में भी वक़्त लग सकता है. जैसे, ओबीसी आरक्षण में वर्गीकरण के लिए भाजपा सरकार ने 2017 में जस्टिस रोहिणी कमेटी का गठन किया था, जिनकी रिपोर्ट 2023 में पूरी हुई. पर ये रिपोर्ट अब ठंडे बस्ते में है।

लेख सामग्री में विचार मेरे निजी है।

धन्यवाद।

 🙏🙏

 Dilip Kumar Udai

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शनिवार, 22 जून 2024

#TheUdai News - 33   

22 जून - 2024 
✍दिलीप कुमार उदय

''पुष्कर कॉरिडोर" बनाम
पुष्कर की मुख्य समस्याए एवं आवश्यकताएं

तीर्थ नगरी पुष्कर के विकास एवं सौंदर्यकरण के नाम पर प्रस्तावित पुष्कर कॉरिडोर एवं पाथवे बनाने की कवायद शुरू होते ही यह विवाद एवं विरोध की भेट चढ़ गया है।

अयोध्या, काशी और उज्जैन की तर्ज पर कॉरिडोर बनाने हेतु, वहाँ पर हुईं तोड़फोड़ को देखते हुए पुष्कर वासियो को भी डर सताने लगा है की यदि तोड़फोड़ हुई तो हमारे घर और व्यवसायिक प्रतिष्ठानो पर भी आंच गिरेगी इसलिए इस प्रस्तावित कॉरिडोर का जमकर विरोध किया जा रहा है।

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में 
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है।....... राहत इन्दोरी की यह शायरी तो आपने सुनी ही होगी।

हाल ही में हुए लोकसभा चुनावो में यूपी के अयोध्या मंडल में  भाजपा की हार और इंडिया की जीत के बाद से ही अयोध्या के निवासियों को सोशल मीडिया पर एक पार्टी विशेष समर्थक लोगो द्वारा जमकर ट्रोल किया गया उनका बहिष्कार, आलोचना करते हुए उन्हें गद्दार करार देते हुए गालियां तक दी गई... गौरतलब यह है कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के उपरान्त भाजपा को यहाँ से प्रचंड जीत मिलने की पूरी उम्मीद थी परन्तु अयोध्या की जनता ने भाजपा की उम्मीदो पर पानी फेर दिया।

सोशल मीडिया पर अयोध्यावासियो को ट्रोल करने वाले लोगो की जमात में शामिल लोगो को पुष्कर कॉरिडोर को लेकर उत्पन्न हुए विरोध से शायद समझ आ गया होगा या आ जायेगा की बुनियादी जरूरतो को कुचल कर धर्म की राजनीति नहीं चल सकती।  इसलिए बिना सोचे समझे किसी को भी ट्रोल न करे धर्म एवं आस्था व्यक्ति का व्यक्तिगत विषय होता है।

भव्य कॉरिडोर बनाने के साथ -साथ यहाँ के नगरवासियों की जिंदगी को भी भव्य बनाने के प्रयास होने चाहिए, करोड़ो रूपये के कॉरिडोर से पूर्व कुछ करोड़ का बजट यहाँ की स्थानीय समस्याओं एवं आवश्यकताओं हेतु खर्च होने चाहिये

तीर्थनगरी पुष्कर श्रद्धा, भक्ति,आस्था, आध्यात्मिक एवं पौरोणिकता के स्वरूप से बना हुवा है इसे सिर्फ पर्यटन की दृष्टि से न देखे। विकास सौन्दर्यकरण के नाम पर तीर्थ नगरी के आध्यात्मिक, व्यवसायिक एवं पर्यटन सभी पहलुओं को समझते हुए पुष्कर तीर्थ का प्राचीन स्वरूप सुरक्षित रखते हुए योजनाओं का क्रियान्वयन करने की रूपरेखा तैयार की जाए।

खेर असल मुद्दे की बात यह है कि  पुष्कर कॉरिडोर बनाम पुष्कर की मूल समस्याएं
भव्य कॉरिडोर में करोड़ों रुपये खर्च करने से पहले
पुष्कर की आवश्यकताओं एवं समस्याओ पर खर्च किया जाना चाहिए।  प्रथम दृष्टि में पहले समस्याओ और आवश्यकताओं का निवारण होना चाहिए उसके उपरांत  कॉरिडोर जैसी योजना वो भी पुष्कर के प्राचीन स्वरुप को बरक़रार रखते हुए पुष्कर वासियो को भरोसे में रखते हुये स्थानीय सुझावों को मध्येनजर रखते हुए निर्णय लिया जाकर।

पुष्कर की कुछ मुख्य समस्याओं एवं आवश्यकताओं की सूची निम्न प्रकार से पेश है.....

1.सरोवर में जाने वाले दूषित पानी एवं प्रतिबंध के बावजूद खाद्य सामग्री बेचने वाली समस्या। 
2.पुष्कर में कई स्थानों पर  बरसाती पानी के भराव की समस्या।
3.पब्लिक टॉयलेट की कमी की समस्या।
4.आवारा पशुओं की समस्या।5.साफ-सफाई की समस्या।
6.ऊंचाई वाले बस स्टैंड पर बसों के ठहराव वाली समस्या।
7.प्रमुख मार्गों पर स्थानीय एवं यात्रियों हेतु जो पैदल पाथवे बने हुए है उनपर अतिक्रमण की समस्या।


8.ब्रह्मा मंदिर परिसर की मरम्मत की आवश्यकता।
9.पब्लिक गार्डन की आवश्यकता।
10.खेल मैदान की आवश्यकता।
11.नवीन हॉस्पिटल की आवश्यकता।
12.राजकीय चिकित्सालय के सामने नेहरू उद्यान की दुर्दशा सुधारने की आवश्यकता।

समस्याओ एवं आवश्यकताओं का पिटारा बहुत लंबा बन सकता  है फिलहाल राज्य-केंद्र तक पहुँच रखने वाले स्थानीय नेतागण एवं प्रशासन इन समस्याओं एवं आवश्यकताओं का ही समाधान कर दीजिए, उसके बाद ही कॉरिडोर के बारे में सोचिये।

नगर पालिका, विधायक (केबिनेट मंत्री) , सांसद (केंद्रीय मंत्री)  से लेकर राज्य और केंद्र तक एक ही पार्टी सत्ता की चेन से जुडी हे तो इस चेन का इस्तेमाल करते हुए पुष्कर के हित को देखते हुए विकास की गंगा की धार को तीर्थ नगरी में लेकर आने का सामर्थ्य जुटाए।

धन्यवाद।
 🙏🙏

 Dilip Kumar Udai
(Bachelor of Journalism & LL.B.)

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सोमवार, 30 अक्टूबर 2023

 #TheUdai News - 32   
28 अक्टूबर 2023
✍दिलीप कुमार उदय

 ''विधायकनामा"
पेश हे विधानसभा क्षेत्र - पुष्कर के प्रत्याशी का परिचयनामा - 2 

भाजपा  प्रत्याशी -  सुरेश सिंह रावत ( पूर्व संसदीय सचिव एवं विधायक)

सुरेश सिंह रावत एक राजनीतिज्ञ और राजस्थान विधान सभा के सदस्य हैं जो राजस्थान के पुष्कर विधानसभा क्षेत्र का वर्ष 2013 से प्रतिनिधित्व कर रहे है 

पुष्कर के इतिहास में सर्वाधिक मतों से जीत हासिल करने का रिकॉर्ड इनके नाम दर्ज है, 10 वर्षो के राजनितिक सफर के दौरान राज्य में भाजपा की सत्ता के समय संसदीय सचिव के पद पर भी रहे सुरेश सिंह रावत पुष्कर क्षेत्र में  से भाजपा के बड़े नेता के रूप में भी जाने जाते है 
  
विधानसभा में विरोध के अनूठे प्रयोग करते हुए  लंपी वायरस के मुद्दे पर गाय को लेकर विधानसभा पहुँच थे इसी प्रकार बिजली का प्रतीकात्मक खम्बा एवं बील लेकर  भी  विरोध  दर्ज करवाकर मीडिया  में में चर्चित रहे थे अभी हाल ही में  पुष्कर के एक कपड़ा व्यापारी के द्वारा भाजपा विधायक सुरेश सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाए गए  हैं इस आरोप के कारण मीडिया में  पुनः खासे चर्चित हुए है 

भाजपा के असंतुष्ट कार्यकर्ता  एक बार पुनः तीसरी बार  विधानसभा क्षेत्र - पुष्कर के प्रत्याशी बनाये जाने पर खफा हे कांग्रेस की तरह यहाँ भी असंतुष्ट कार्यकर्ता नाखुश, निराश, हताश और मायुश है  इस वजह से बागी उम्मीदवार या अन्य राजनितिक दांव -पेच में जीत की हैट्रिक में अड़चने रुकावटे पैदा होने के आसार बन सकते है 

राजस्थान विधान सभा सचिवालय, विधानसभा सदन 14  (2013-18) एवं सदन 15 (2018-23) के अनुसार भाजपा  प्रत्याशी का परिचय 

सुरेश सिंह रावत 
पिता का नाम श्री सूरज सिंह रावत
माता का नाम श्रीमती राधा देवी रावत

लिँग पुरुष
जन्म तिथि एवं स्थान 28/3/1980 ग्राम मुहामी, अजमेर
शिक्षा स्‍नातक (बी.ए. (आनर्स)), महर्षि दयानन्‍द सरस्‍वती विश्‍वविद्धालय, अजमेर
जीवनसाथी का नाम श्रीमती रेखा रावत
विवाह की तिथि 29/11/2008
बच्चों की संख्या 2 पुत्र
व्यवसाय कृषि
मोबाइल नंबर 9414006464
सदस्य श्रेणी सामान्य

पद
2013-18 सदस्य, चौदहवीं राजस्थान विधान सभा
2018-23 सदस्य, पंद्रहवीं राजस्थान विधान सभा
02/04/2014-27/05/2016 सदस्य, याचिका समिति, राजस्थान विधान सभा
27/05/2016-01/05/2017 सदस्य, नियम समिति, राजस्थान विधान सभा
18/01/2016 - 17/12/2018 संसदीय सचिव, कार्यकाल, राजस्थान सरकार
सामाजिक पद
अध्यक्ष, तीर्थ गुरु श्री पुष्‍करराज विकास न्‍यास, पुष्‍कर, जिला अजमेर
2000-2002 सदस्य, अखिल भारतीय रावत युवा महासभा, राजस्‍थान
राजनीतिक पद
प्रदेश मंत्री, भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा, राजस्‍थान
प्रदेश महामंत्री, खेल प्रकोष्‍ठ, भारतीय जनता पार्टी, राजस्‍थान
2009-2013 मण्‍डल अध्‍यक्ष, भारतीय जनता पार्टी, श्रीनगर मण्‍डल, जिला अजमेर
अन्य पद
2017 से प्रदेश उपाध्यक्ष, भारत स्‍काउट एवं गाइड, राजस्‍थान
अन्य जानकारी
खेलकूद - क्रिकेट, कब्‍बडी (राष्‍ट्रीय स्‍तर पर)
विदेश यात्रा
गल्‍फ कन्‍ट्रीज (दुबई व 6 अन्‍य देश), हांगकांग, मॉरिशस, सिंगापुर

सम्मान एवं पुरस्कार
रावत रत्‍न, रावत महासभा, राजस्‍थान

स्थायी पता
बाबा फार्म, ग्राम मुहामी, वाया गगवाना, जिला अजमेर

स्थानीय पता
 एफ-19, विधायकपुरी, जयपुर

उपरोक्त उपलब्ध जानकारी अनुसार सावधानी पूर्वक तथ्यो की सामग्री को समावेश करते हुए परिचय को प्रेषित किया गया है यदि फिर भी किसी प्रकार की त्रुटि या जानकारी छूट गई हो तो टीम सुरेश सिंह रावत जानकारी उपलब्ध कराने का कष्ट कर सकते है, ताकि हम अपने ब्लॉग में जानकारी अपडेट कर सके।
धन्यवाद।

 भाजपा  प्रत्याशी -  सुरेश सिंह रावत के राजनितिक सफर में दर्ज हुई  जीत का संक्षिप्त ब्यौरा

सदन सं. 14 (2013-18) कुल प्राप्त मत 90013 निकटतम प्रतिद्धंदी  श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ (मत 48723) अन्तर - 41290  परिणाम -  सुरेश सिंह रावत  की जीत 

सदन सं. 15 (2018-23) कुल प्राप्त मत  84860 निकटतम प्रतिद्धंदी श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ  (मत  75471) अन्तर - 9389 परिणाम - सुरेश सिंह रावत  की जीत 

 Dilip Kumar Udai
(Bachelor of Journalism & LL.B.)

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शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2023

#TheUdai News - 31  
27 अक्टूबर 2023
✍दिलीप कुमार उदय

 ''विधायकनामा"

पेश हे विधानसभा क्षेत्र - पुष्कर के प्रत्याशी का परिचयनामा - 1

पहला परिचय कांग्रेस प्रत्याशी - श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ (प्रदेश कांग्रेस कमेटी उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री नसीम अख्तर इंसाफ) का

पुष्कर विधानसभा क्षेत्र में सक्रियता लगातार बरक़रार रखने एवं पायलट समर्थक छवि के कारण आलाकमान ने नसीम के साथ किया इंसाफ!

कांग्रेस प्रत्याशी - श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ पुष्कर क्षेत्र में लगातार सक्रीय रहने के कारण हमेशा चर्चों में रहती है, पिछले 2 विधान सभा चुनाव हारने के बावजूद पार्टी ने फिर दिया मौका, समर्थको में जबरदस्त उत्साह और खुशी की लहर, असंतुष्ट कार्यकर्ता नाखुश, निराश, हताश और मायुश, भारत जोड़ो यात्रा में नसीम ने सक्रीयता दिखाते हुए समर्थको के साथ यात्रा में हुई थी शामिल| समर्थक टीम नसीम के नाम से सोशल मीडिया में जय जयकार एवं गुणगान करने में अव्वल, नसीम विधानसभा क्षेत्र - पुष्कर में आयोजित छोटे से लेकर बड़े सामजिक कार्यक्रमो में अपनी उपस्थति दर्ज करवाकर आमजन में बेहतर नेता की छवि का आभास कराने में माहिर|

असंतुष्ट कार्यकर्ता बागी उम्मीदवार द्वारा या अन्य तरीके से इन्साफ की डगर पर नसीम की राह में रोड़े पैदा करने, संकट पैदा करने को बेताब है ऐसी चर्चाओं का बाजार में पुष्कर गर्म हो चूका है|

राजस्थान विधान सभा सचिवालय, विधानसभा सदन 13 (2008-13) के अनुसार कांग्रेस प्रत्याशी - श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ का परिचय

सदन सं. 13 (2008-13), जिला - अजमेर, चुनाव क्षेत्र - पुष्कर (सामान्य), दल - इण्डियन नेशनल कांग्रेस, चुनाव - आम चुनाव, विभाजन सं. - 80, कुल प्राप्त मत 42881, निकटतम प्रतिद्धंदी - श्री भंवरसिंह पलाडा (मत 36347)  6534 के अंतर् से जीत दर्ज करते हुए विधानसभा की दहलीज पर प्रवेश किया था 

श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ

पिता का नाम - श्री हाजी मोहम्मद यूसुफ पंवार

माता का नाम - श्रीमती हज्‍जानी जेबुनिशा

लिँग -  स्त्री

जन्म तिथि एवं स्थान -  28/5/1971 ग्राम पीसांगन, तहसील पीसांगन, जिला अजमेर

शिक्षा - स्‍नातक (बी.ए.), महर्षि दयानन्‍द सरस्‍वती विश्‍वविद्धालय, अजमेर

स्‍नातक (बी.एड.-कला), महर्षि दयानन्‍द सरस्‍वती विश्‍वविद्धालय, अजमेर

जीवनसाथी का नाम -  हाजी इंसाफ अली

विवाह की तिथि - 18/5/1990

बच्चों की संख्या - 2 पुत्र

व्यवसाय - गृहिणी

दूरभाष -  01452644786

मोबाइल नंबर -  9799586659

सदस्य श्रेणी - मुस्लिम

पद :

2008-13 - सदस्य, तेरहवीं राजस्थान विधान सभा

13/04/2009 -16/11/2011 - सदस्य, प्राक्कलन समिति (ख), राजस्थान विधान सभा

31/05/2010 - 31/03/2011 - सदस्य, महिलाओं एवं बालकों के कल्याण सम्‍बन्‍धी समिति, राजस्थान विधान सभा

17/11/2011 - 09/12/2013 - राज्य मंत्री, कार्यकाल, राजस्थान सरकार

17/11/2011 - 09/12/2013 - राज्य मंत्री, प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार

17/11/2011 - 09/12/2013 - राज्य मंत्री, भाषा विभाग, राजस्थान सरकार

17/11/2011 - 09/12/2013 - राज्य मंत्री, भाषाई अल्प संख्यक विभाग, राजस्थान सरकार

सामाजिक पद

2001 से - अध्यक्ष, महिला विकास समिति, अजमेर

राजनीतिक पद

1991 - जिलाध्यक्ष, देहात जिला कांग्रेस कमेटी (अल्‍पसंख्‍यक प्रकोष्‍ठ), अजमेर

1995 - उपाध्यक्ष, ब्‍लॉक उपाध्‍यक्ष, ब्‍लॉंक कांग्रेस कमेटी, पीसांगन, अजमेर

2001 - सचिव, संयुक्‍त सचिव, जिला कांग्रेस कमेटी, अजमेर

2005 - उपाध्यक्ष, ब्‍लॉक उपाध्‍यक्ष, ब्‍लॉक कांग्रेस कमेटी, श्री नगर (पुष्‍कर व नसीराबाद क्षेत्र)

अन्य पद

1995 - सदस्य, पंचायत समिति, पीसांगन, अजमेर

2005 - सदस्य, जिला परिषद्, अजमेर

2001 - पार्षद, नगर परिषद्, अजमेर

अन्य जानकारी

विदेश यात्रा - हज यात्राा सउदी अरब (मक्‍का, मदीना)

विशेष अभिरुचि - साहित्‍य पठन, अनाथ बच्‍चों का नि:शुल्‍क अध्‍यापन

सम्मान एवं पुरस्कार - समाज सेवा में उत्‍कृष्‍ट कार्य करने पर पुरस्‍कृत

सामाजिक कार्यकलाप - सूफी शहबाज वेलफेयर सोसायटी (रजि. अजमेर)

स्थायी पता - 2531, बलदेव  नगर, माकड़वाली रोड़, अजमेर ।

श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ के राजनितिक सफर में दर्ज हुई  हार - जीत का संक्षिप्त ब्यौरा 

सदन सं. 13 (2008-13) कुल प्राप्त मत 42881, निकटतम प्रतिद्धंदी - श्री भंवरसिंह पलाडा (मत 36347) अन्तर - 6534 परिणाम  - श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ की जीत

सदन सं. 14 (2013-18) कुल प्राप्त मत 48723 निकटतम प्रतिद्धंदी श्री सुरेश सिंह रावत (मत 90013) अन्तर - 41290 परिणाम - श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ की हार

सदन सं. 15 (2018-23) कुल प्राप्त मत 75471 निकटतम प्रतिद्धंदी श्री सुरेश सिंह रावत (मत 84860) अन्तर - 9389 परिणाम - श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ की हार

Dilip Kumar Udai
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रविवार, 8 अक्टूबर 2023

#TheUdai News - 30 
08 अक्टूबर 2023
✍दिलीप कुमार उदय

 जाति जनगणना उचित या अनुचित ?  

जातिगत जनगणना से केंद्र सरकार विरोध में क्यों है, डर किस बात का ? 

जाति जनगणना से सामाजिक, शैक्षिक व आर्थिक स्थिति का भी आंकलन होगा!

जितनी आबादी उतना हक, इससे साफ है कि वो देशवासियों में आपसी खाई और वैर-भाव बढ़ाना चाहती है। गरीब ही सबसे बड़ी जाति और सबसे बड़ी आबादी है - पीएम नरेंद्र मोदी

कांग्रेस पार्टी अगर केंद्र की सत्ता में आई तो देश में भर में ओ.बी.सी. के लोगों की सटीक संख्या का पता लगाने के लिए कास्ट सेंसस कराया जाएगा, "अब वह समय आ गया है कि हमें हिंदुस्तान का एक्स-रे करना है." - राहुल गांधी

राहुल गांधी  ने यह भी कहा - पता लगाना है कि अगर 90 अफसर देश को चला रहे हैं और उसमें ओबीसी की भागीदारी 5 फ़ीसदी है तो क्या ओबीसी की आबादी 5 फीसदी है? देश में एक ही मुद्दा है जातिगत जनगणना ओबीसी कितने हैं और उनकी भागीदारी कितनी होनी चाहिए?

जनगणना कराने का प्रावधान केंद्र के पास है जनगणना केंद्र सरकार ही करवा सकती है इसलिए  राजस्थान में जातिगत जनगणना नही सर्वे करवाया जायेगा  - अशोक गहलोत 

चुनाव से पूर्व राजस्थान के माननीय मुख़्यमंत्री श्री अशोक गहलोत का एक और पैंतरा बिहार की तर्ज पर राजस्थान में भी होगा जातिगत जनगणना का सर्वे, जनगणना के आंकड़ों के आधार पर भागीदारी सुनिश्चित करने की बात  कही जा रही है। 

सबसे पहले जान लेते हे जनगणना की कुण्डली  :-

वर्ष 1881 औपनिवेशिक काल (भारत में अंग्रेज़ों के शासन काल) के दौरान भारत में जनगणना की शुरुआत  हुई थी तब से  लेकर अभी तक 16 (सोलहवीं ) जनगणना 2021 में पूर्ण होने वाली थी परन्तु  कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कारण इस  जनगणना को स्थगित कर दिया गया था।

जनगणना से अभिप्राय यह है की एक सुपरिभाषित हिस्से के सभी व्यक्तियों के एक विशिष्ट समय पर जनसांख्यिकीय, आर्थिक और सामाजिक आंकड़े (डेटा) एकत्र करना , उसका संकलन करना, विश्लेषण करना और उसे प्रसारित करना होता है साथ ही यह  जनसंख्या की विशेषताओं पर भी पेनी नजर डालना है।

Socio-Economic and Caste Census- SECC सामाजिक-आर्थिक और जाति-जनगणना देश में पहली बार वर्ष 1931 में  हुई थी उसके बाद जाति-जनगणना पहली बार वर्ष 2011 में आयोजित की गई थी हालांकि 2011 से लेकर 2023 के अंतिम पड़ाव तक भी जाति-जनगणना वर्ष 2011 के आँकडो  के बड़े अंश (भाग ) प्रकाशित नहीं किये गए हैं।  

SECC का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक भारतीय परिवार (ग्रामीण और शहरी) से उनकी आर्थिक स्थिति एवं उसकी विशिष्ट जाति का नाम पूछकर आँकड़े एकत्रित करना था । आर्थिक स्थिति से यह आंकलन लगाना ताकि पुनर्मूल्यांकन करने में सहायता मिल सके की कोन व्यक्ति गरीब या वंचित है उन्हें नामित किया जा सके साथ ही कौन-सी जाति समूह आर्थिक रूप से पिछड़े थे और कौन से बेहतर थे राज्यों को सहायता कैसे वितरित की जाए, परिसीमन प्रक्रिया कैसे की जाए एवं संसाधनों  की दशा और दिशा  की रूपरेखा का निर्माण किस प्रकार किया जायेगा कैसे क्रियान्वन होगा मोठे तोर पर यही उद्देश्य होता है।

SECC और जनगणना के बीच का फेर समझना होगा - SECC राज्य द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता के लाभार्थियों की पहचान करने की एक विधि या उपकरण है जबकि जनगणना भारतीय जनसंख्या का एक मानचित्र पेश करती है।

जातिगत जनगणना की मांग बरसों से है यह कोई नई मांग नहीं है पक्ष और विपक्ष के राजनितिक दलों ने जाति जनगणना कराने की मांग लगातार उठाई है विपक्ष के साथ साथ एनडीए के भी कई सहयोगी दल भी राष्ट्रीय स्तर पर इसकी मांग करते आये है और कर रहे हैं। बिहार ने इस मांग को पूरा करने के लिए सर्वे की प्रक्रिया को पूर्ण करके जातिगत जनगणना के सर्वे आंकड़े सार्वजनिक कर दिए है इस पर केंद्र सरकार का विरोध बरक़रार है मालूम हो की 2018 में, तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ओबीसी और एसईबीसी की पहचान के लिए जाति-आधारित सर्वेक्षण का वादा किया था। अब बीजेपी इसका विरोध कर रही है ? बीजेपी का नारा है - 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' तो वह इस नारे से दूर क्यों भाग रही है ?”

बिहार में जाति जनगणना को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में जाति सर्वेक्षण आंकड़े प्रकाशित करने पर रोक लगाने से इनकार करते हुए  कहा की वह राज्य द्वारा लिए गए नीतिगत निर्णय पर रोक नहीं लगाई जा सकती

मेरा स्पष्ट मानना है कि जातिगत जनगणना एक उचित मांग है

भारत में जाति जनगणना कराने की मांग राजनीतिक दलों एवं सामाजिक चिंतकों ने भी उठाई है इनके साथ साथ  ओ.बी.सी. समाज द्वारा भी यह मांग बार बार उठाई गई हे इस मांग का सबसे प्रभावपूर्ण कारण आरक्षण है। देश में आरक्षण को लेकर दो बड़े संशोधन - पहला EWS आरक्षण और दूसरा राज्यों को ओ.बी.सी. वर्ग की पहचान करने का अधिकार इन दोनों संशोधनों ने जातिगत जनगणना की मांग को गति प्रदान की है। जातिगत जनगणना से राज्य अपने स्तर पर ओ.बी.सी. वर्ग की पहचान सुनिश्चित कर उसी अनुपात में उन्हें आरक्षण का लाभ प्रदान करने में सक्षम होगा और मद्रास उच्च न्यायालय के एक फैसले से भी गति मिली हे फैसले में कहा गया हे की जाति जनगणना राज्य का विशेषाधिकार है राज्य के लिए आवश्यक है।

राज्य के नीति-निर्माण में सामाजिक वर्ग की वास्तविक स्थिति का पता ही नहीं होगा तो उनका उत्थान कैसे संभव हो पाएगा? वंचित वर्ग को मुख्यधारा में लेकर आने के लिए उनकी वास्तविक स्थिति, संख्या, सामाजिक, शैक्षिक एवं आर्थिक स्थिति के अध्ययन करने के बाद ही मुख्यधारा में क्रियान्वित किया जा सकता है।

सबका साथ-सबका विकास,सबका विश्वास-सबका प्रयास की संकल्पना से  देश सही मायनों में विकसित एवं सफल राष्ट्र तब बन पायेगा जब  समाज के सभी वर्गों का कल्याण सुनिश्चित किया जायेगा

संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण में व्यापक रूप से असमानता हे तो इस असमानता को समाप्त करने हेतु वंचितों की गणना करना न्यायोचित निर्णय है।

जाति जनगणना देश में जाति आधारित राजनीति को बढ़ावा देगी यह कहना अनुचित होगा , भारत की राजनीति में जाति का बहुत ही प्रबल प्रभाव बरसो से चला आ रहा और आगामी वर्षो में यह बरकरा रहने जैसा ही प्रतीत हो रहा है।

जनता के सामने मुख्य मीडिया संस्थानों द्वारा जातिगत जनगणना को लेकर स्पष्ट रुख नहीं रखा जा रहा है इस मुद्दे पर राजनीति करते हुए  हिन्दू धर्म की और धकेल कर विरोधाभास खड़ा किया जा रहा  है सोशल मीडिया में चर्चा की जा रही हे की यह हिन्दुओ को बाटने और आपस में फुट डालने जैसा आत्मघाती कदम है जबकि हकीकत एवं सच्चाई सिरे से बिलकुल अलग है इसके लिए तथ्यात्मक रूप से समझने की आवश्यकता है।

जब विभिन्न समुदाय एवं समाज अपने अपने जातिगत महासम्मेलन आयोजित करती है इन तमाम आयोजनों में पार्टी विचारधारा को परे करते हुए तमाम पार्टी के नेतागण एवं सामजसेवी स्वयं की जाती का उत्थान करने हेतु अपनी जाति के लिए सामाजिक, शैक्षिक व आर्थिक एवं राजनितिक भागीदारी की हुंकार बड़े  जोर शोर से करते है जाति के नाम पर किसी भी हद तक जाने को तत्पर रहते हे यदि ऐसा करना उनका उचित कदम एवं अधिकार हे तो  जब यही कार्य बिहार एवं राजस्थान की सरकार द्वारा जाति जनगणना सर्वे के माध्यम से सबका विकास सबका कल्याण करते हुए जाति अनुपात के माध्यम से व्याप्त विसंगतियों को दूर करते हुए सभी की भागीदारी सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाकर किया जाने वाला कदम हे तो यह कदम गलत कैसे हो सकता हे यह तो सटीक रूप से उचित कदम और उचित फैसला है।

जाति जनगणना सर्वे से प्राप्त आंकडो  के संग्रह (डेटा क्लेक्शन) से  योजनाओं का बेहतर इंप्लीमेंटेशन (क्रियान्वन)  होगा ऐसा मेरा मानना है। 

जाति जनगणना जातिविहीन समाज के लक्ष्य के लिये भले ही अनुकूल न हो लेकिन यह समाज में व्याप्त असमानताओं को दूर करने में कारगर रूप से सही साबित हो सकती है।

लेख में व्यक्त विचार मेरे निजी है

धन्यवाद🙏🙏

Dilip Kumar Udai
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सोमवार, 11 सितंबर 2023

जी20 से दुनिया और भारत को क्या हासिल हुआ

#TheUdai News - 29 
11 सितम्बर 2023
✍दिलीप कुमार उदय
 
जी20 से दुनिया और भारत को क्या हासिल हुआ ?? 

अगले विश्व गुरु लूला जी!! 

 "महात्मा गांधी को जी20 के ग्लोबल नेताओं ने दी श्रदांजलि" 

 "जी20 बजट 900 करोड़, खर्च  किये 4100 करोड़ से ज्यादा" 

 "न करूंगा, न करने दूंगा"

इस G20 शिखर सम्मेलन की मुख्य बातें - 
One Earth. एक पृथ्वी 
One Family. एक परिवार 
One Future.  एक भविष्य 

जी20 सदस्यों द्वारा दिल्ली घोषणा पत्र को स्वीकार एवं समर्थन से भारत के लिए यह एक कूटनीतिक जीत एवं  बड़ी कामयाबी की तर्ज पर देखा जा सकता हे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा को अपनाने की सराहना की है और उनके समर्थन और सहयोग के लिए सभी साथी जी20 सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया है।

लचीले बुनियादी ढांचे का निर्माण, गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे में निवेश, और एक बेहतर भविष्य बनाना जो सभी के लिए अधिक अवसर, सम्मान और समृद्धि का प्रतिनिधित्व करे।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जी20 सदस्य देशों के नेताओं के साथ प्रतिष्ठित राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने रेखांकित किया कि गांधी जी के शाश्वत आदर्श सामंजस्यपूर्ण, समावेशी और समृद्ध वैश्विक भविष्य के लिए सामूहिक दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करते हैं।

विश्व गुरु फॉर्मूला
अब समझने वाली बात यह हे की भारत से पूर्व भी कई देशों ने जी20 की  मेजबानी की थी परन्तु भारत द्वारा की गई मेजबानी एवं कामयाबी को मुख्यधारा का मीडिया एवं पार्टी विशेष का आईटी सेल सत्ताधारी पार्टी की व्यक्तिगत कामयाबी मानकर पेश कर रहा है वही दूसरी तरफ इस जी 20 सम्मेलन को लेकर विपक्ष सरकार की आलोचना करके सवाल भी दाग रहा है 

मोदी जी को विश्व गुरु बताकर पार्टी प्रचार प्रसार किया जा रहा हे जबकि G20 शिखर सम्मेलन प्रतिवर्ष एक क्रमिक अध्यक्षता में आयोजित किया जाता है, तो उसके अनुरूप अगली क्रमिक जी 20 की अध्यक्षता की जिम्मेदारी ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा को सौंपी गई है तो फिर अगले  *विश्व गुरु लूला जी होंगे!!*

प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के साथ जी20 के ग्लोबल नेताओं ने महात्मा गांधी को श्रदांजलि एवं श्रदा सुमन अर्पित करके गाँधी के खिलाफ विपरीत विचारधारा रखने वाले तमाम लोगो को बता दिया हे की  गांधी की विरासत एवं विचारधारा का जलवा बरकरार रहेगा

प्रधान मंत्री का एक्स पर पोस्ट : 

“प्रतिष्ठित राजघाट पर, जी20 परिवार ने शांति, सेवा, करुणा और अहिंसा के प्रतीक महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। जैसे-जैसे विविध राष्ट्र एकजुट हो रहे हैं, गांधी जी के शाश्वत आदर्श सामंजस्यपूर्ण, समावेशी और समृद्ध वैश्विक भविष्य के लिए हमारी सामूहिक दृष्टि का मार्गदर्शन करते हैं।''

राष्ट्रपति बाइडेन का एक्स पर पोस्ट:
आज राजघाट स्मारक पर जाना और अपने साथी जी20 नेताओं के साथ पुष्पांजलि अर्पित करना सम्मान की बात थी। महात्मा गांधी का अहिंसा, सम्मान और सत्य का संदेश आज पहले से कहीं अधिक मायने रखता है - यह दुनिया को प्रेरित करता रहे और हमारे देशों के बीच बंधन का आधार बने

जी20 बजट 900 करोड़, खर्च  किये 4100 करोड़ से ज्यादा
मीडिया में प्रकाशित सूत्र - सरकारी रिकॉर्ड अनुसार, 9-10 सितंबर को हुए इस जी 20 समिट में 4,100 करोड़ रुपये से अधिक का खर्चा हुआ है। रिकॉर्ड्स के अनुसार इन खर्चों को मोटे तौर पर करीब 12 कैटेगरीज में बांटा गया है। साल 2023-24 के बजट में जी20 सम्मेलन की अध्यक्षता के लिए 990 करोड़ रुपये आवंटित किये गए थे।

 'न करूंगा, न करने दूंगा'
 वियतनाम में बाइडेन के संबोधन के बाद जयराम रमेश का प्रधानमंत्री पर तंज 

जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद वियतनाम पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने मीडिया सम्बोधन में जिक्र किया की मैंने पीएम मोदी से मानवाधिकारों के सम्मान, स्वतंत्र प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका एवं समृद्ध देश के विकास में नागरिक संस्थाओं के महत्व को लेकर चर्चा की हे इसी बयान को लेकर जयराम रमेश ने (ट्विटर) एक्स' पर प्रधानमंत्री  पर तंज कसकर कहा  की 'न करूंगा, न करने दूंगा'

(भारत ने प्रोटोकॉल तय किये थे उसके अनुसार राष्ट्रपति बाइडेन के साथ आये पत्रकार राष्ट्रपति बाइडेन एवं प्रधानमंत्री मोदी से प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये सवाल नही पूछ पायेंगे)

धन्यवाद🙏🙏

Dilip Kumar Udai
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रविवार, 10 सितंबर 2023

जी-20 क्या है ?

 #TheUdai - 28 
10 सितम्बर 2023
✍दिलीप कुमार उदय

जी-20 क्या है ?

G20 - ग्रुप ऑफ ट्वेंटी (G20) अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच है। यह सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मुद्दों पर वैश्विक संरचना और अधिशासन निर्धारित करने तथा उसे मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इंडिया अर्थात भारत 1 दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023 तक G20 की अध्यक्षता करेगा।

G20 की स्थापना

G20 की स्थापना 1999 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों के लिए वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में की गई थी। 2007 के वैश्विक आर्थिक और वित्तीय संकट के मद्देनजर G20 को राष्ट्राध्यक्षों/शासनाध्यक्षों के स्तर तक उन्नत किया गया था, और 2009 में इसे "अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग हेतु प्रमुख मंच" के रूप में नामित किया गया था।

G20 शिखर सम्मेलन प्रतिवर्ष एक क्रमिक अध्यक्षता में आयोजित किया जाता है। 

शुरुआत में G20 व्यापक आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित था, परंतु बाद में इसके एजेंडे में विस्तार करते हुए इसमें अन्य बातों के साथ व्यापार, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और भ्रष्टाचार-विरोध शामिल किया गया। 

G20 के सदस्य

ग्रुप ऑफ ट्वेंटी (G20) में 19 देश (अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) और यूरोपीय संघ शामिल हैं। G20 सदस्य देशों में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 85%, वैश्विक व्यापार का 75% से अधिक और विश्व की लगभग दो-तिहाई आबादी है।

अतिथि देश : 

बांग्लादेश, ईजिप्ट ,मॉरिशस, नीदरलैंड, नाइजीरिया, ओमान, सिंगापुर, स्पेन, संयुक्त अरब अमीरात

आमंत्रित अंतर्राष्ट्रीय संगठन : 

नियमित अंतर्राष्ट्रीय संगठनों (यूएन, आईएमएफ, डब्ल्यूबी, डब्ल्यूएचओ, डब्ल्यूटीओ, आईएलओ, एफएसबी और ओईसीडी) और क्षेत्रीय संगठनों (एयू, एयूडीए-एनईपीएडी और आसियान) की पीठों के अतिरिक्त G20 के अध्यक्ष के रूप में भारत द्वारा आईएसए, सीडीआरआई और एडीबी को अतिथि अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के रूप में आमंत्रित किया जाएगा।

G20 की कार्यशैली 

G20 अध्यक्षता के तहत एक वर्ष के लिए G20 एजेंडा का संचालन किया जाता है और शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। 

G20 में दो समानांतर ट्रैक होते हैं: वित्त ट्रैक और शेरपा ट्रैक। वित्त मंत्री और सेंट्रल बैंक के गवर्नर वित्त ट्रैक का नेतृत्व करते हैं जबकि शेरपा ट्रैक का नेतृत्व शेरपा करते हैं।

शेरपा पक्ष की ओर से G20 प्रक्रिया का समन्वय सदस्य देशों के शेरपाओं द्वारा किया जाता है, जो नेताओं के निजी प्रतिनिधि होते हैं। वित्त ट्रैक का नेतृत्व सदस्य देशों के वित्त मंत्री और सेंट्रल बैंक गवर्नर करते हैं। दो ट्रैक के भीतर, विषयगत रूप से उन्मुख कार्य समूह हैं जिनमें सदस्यों के संबंधित मंत्रालयों के साथ-साथ आमंत्रित/अतिथि देशों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेते हैं (वित्त ट्रैक मुख्य रूप से वित्त मंत्रालय के नेतृत्व में है)। ये कार्य समूह प्रत्येक अध्यक्षता के पूरे कार्यकाल में नियमित बैठकें करते हैं। शेरपा वर्ष के दौरान हुई वार्ता का पर्यवेक्षण करते हैं, शिखर सम्मेलन के लिए एजेंडा आइटम पर चर्चा करते हैं और G20 के मूल कार्य का समन्वय करते हैं।

इसके अलावा, ऐसे सम्पर्क समूह हैं जो G20 देशों के नागरिक समाजों, सांसदों, विचार मचों, महिलाओं, युवाओं, श्रमिकों, व्यवसायों और शोधकर्ताओं को एक साथ लाते हैं।

इस समूह का कोई स्थायी सचिवालय नहीं है। इसकी अध्यक्षता ट्रोइका द्वारा समर्थित है - पिछला, वर्तमान और आने वाला अध्यक्षता। भारत की अध्यक्षता के दौरान, ट्रोइका में क्रमशः इंडोनेशिया, भारत और ब्राजील शामिल होंगे

लेख सामग्री साभार : G20 ऑर्गेनाइजेशन

धन्यवाद🙏🙏

Dilip Kumar Udai
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शनिवार, 9 सितंबर 2023

असल मुद्दे बनाम ध्यान भटकाऊ रणनीतिक मुद्दे

 #TheUdai - 27

10 सितम्बर 2023

✍दिलीप कुमार उदय

व्यंग्यात्मक अल्फाज प्रस्तुत है :-

देश के असल मुद्दे बनाम ध्यान भटकाऊ रणनीतिक मुद्दे

सभी को विदित है की देश के असल मुद्दे क्या है!!!

फिर भी राजनीति करने वाले देश की जनता को बगला कर मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाकर सिर्फ और सिर्फ ऐसे मुद्दों पर लाकर खड़ा कर देती है जो देश के नागरिकों को बांटने का कार्य बखूबी कर देती है। राजनीतिक पार्टियों को बहुत ही शानदार तजुर्बा और अनुभव है इनके पास विवादित मुद्दों की पूरी खान है कि कब कोनसा किस समय क्या मुद्दा जनता के समक्ष पेश करना है, ताकि असल मुद्दों से ध्यान भटकाकर राजनीतिक लाभ अर्जित किये जा सके।

अभी हाल ही का नया विवादित मुद्दा  *इंडिया बनाम भारत*

देश के राजनीतिक गलियारों से लेकर चाय -चौपाल, तमाम मीडिया, घर परिवार तक एक बहस का मुद्दा बड़ी चालाकी से छोड़ दिया गया है। *इस मुद्दे को लेकर हकीकत में जैसा जनता सोच रही है प्रतिक्रिया कर रही है वैसा कुछ नही है। मुद्दे को सिर्फ चुनावी माहौल में जनता को बगलाने हेतु पेश किया जा रहा है। यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नफे नुकसान के लिए ही लाया गया है, सत्ता हो या विपक्ष दोनों ही अपनी राजनीतिक रोटियां सेखने में निपुण है।*

देश के सत्ता पक्ष को पटखनी देने हेतु विपक्ष ने इंडिया (Indian National Developmental Inclusive Alliance - I.N.D.I.A) नाम का नया गठबंधन बनाकर देश की राजनीति में उथल पुथल मचाने की तैयारी युद्धस्तर पर की जा रही है।

क्योंकि जैसे ही देश के विपक्ष ने

इंडिया नाम से नया गठबंधन बनाया केंद्र के सत्ता पक्ष को अचानक *इंडिया बनाम भारत याद आ गया।*  संघ प्रमुख ने एक कार्यक्रम में कहाँ कि इंडिया की जगह भारत का नाम इस्तेमाल हो ,एक तरह से यह उनकी अपील थी ..... उसके उपरांत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से जी-20 के रात्रिभोज निमंत्रण में  प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया की जगह प्रेसिडेंट ऑफ़ भारत लिखा होने से लेकर चल रहे ज़ी -20 सम्मेलन तक में...इंडिया बनाम भारत करके मुद्दे को गर्म किया जा रहा है।

विपक्ष (इंडिया दल) आरोप मंढ रहे है कि केंद्र सरकार देश के नाम के तौर पर *इंडिया शब्द का इस्तेमाल बंद करके अब केवल भारत* कहे जाने की योजना पर  कार्य कर रही है।

उपरोक्त आरोप पर केंद्र सरकार हो या राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

असल मे पिछले 9 वर्षों में कई योजनाएं इंडिया नाम से केंद्र ने चलाई है .....उसी पर तंज कसते हुए कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य *गुरदीप सप्पल*  ने ट्वीट (अब X) किया है........

मोदी सरकार की दो सौ से ज़्यादा योजनाएँ चल रही हैं। इनमें से:

*52* योजनाओं का नाम इण्डिया पर है

*22* योजनाओं का नाम प्रधानमंत्री पर है 

और सिर्फ़ *5* योजनाओं का नाम भारत पर है।

ये भारत प्रेम नया नया ही है, INDIA गठबंधन से डर कर है।

*मायावती (BSP) ने कहा* : 

भारत बनाम इंडिया में बीजेपी ने गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी और विकास के जरूरी मुद्दों को दरकिनार कर दिया है। इसलिए BSP पार्टी... इन जातिवादी, सांप्रदायिक एवं पूंजीवादी गठबंधनो से दूरी बनाए रखना सही समझती है।

*बीजेपी सांसद सुशील मोदी ने कहा*  संविधान में भारत और इंडिया दोनों है, अगर 75 सालों से भारत को इंडिया लिखा गया है तो प्रेसिडेंट ऑफ भारत लिखने में क्या आपत्ति है? हम "भारत माता की जय" बोलते हैं। विपक्ष यदि "इंडिया माता की जय" बोलना चाहे तो बोले।

*अरविंद केजरीवाल ने कहा*  देश 140 करोड लोगों का है किसी एक पार्टी का देश नही है अगर मान लीजिए कल को  इंडिया एलाइंस ने अपना नाम परिवर्तन करके यदि भारत रख लिया तो फिर BJP भारत का नाम भी बदल देंगें ? फिर क्या भारत का नाम बीजेपी रखेंगे!

*कांग्रेस के जयराम रमेश* ने कहा इंडिया शाइनिंग का नारा BJP लेकर आई थी। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, न्यू इंडिया ऐसे कई चीजे है उसके जवाब में कांग्रेस ने *भारत जोड़ो यात्रा शुरू की।*

*गौरव गोगई* ने कहा इसरो,आईआईटी, आईआईएम, 

आईएस,आईपीएस आदि इन सभी मे आई का मतलब इंडिया ही है BJP सरकार इंडिया गठबंधन से इतना डर गई है कि बेबुनियाद काम कर रही है।

*राहुल गांधी* ने कहा कि : दिलचस्प बात है, हम जब भी अडानी पर सवाल उठाते हैं, मोदी जी एक नया ‘distraction’ ले आते हैं।

'INDIA या भारत' भी एक ऐसा ही मुद्दा है।

अब सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि...*2004 में जब 'भारत' नाम का भाजपा ने विरोध किया था!*

मुलायम सिंह यादव की कैबिनेट ने एक प्रस्ताव पारित किया कि संविधान में संशोधन करके 'इंडिया, दैट इज़ भारत' की जगह 'भारत, दैट इज़ इंडिया' लिखा जाना चाहिए। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने फिर यह प्रस्ताव राज्य विधान सभा में रखा, *भाजपा को छोड़कर सभी ने इसे स्वीकार कर लिया।* भाजपा ने प्रस्ताव पारित होने से पहले ही वॉकआउट कर दिया था।

वर्ष 2010 और 2012 में कांग्रेस के सांसद शांताराम नाइक ने इस मुद्दे पर दो प्राइवेट बिल पेश किए थे, इस बिल के जरिए उन्होंने *संविधान से इंडिया शब्द पूरी तरह से हटाने का प्रस्ताव रखा था।*

वर्ष *2015 में योगी आदित्यनाथ* भी इस मुद्दे पर प्राइवेट बिल पेश कर चुके हैं। इस बिल में उन्होंने *संविधान में ‘इंडिया, दैट इज भारत’ की जगह ‘इंडिया, दैट इज हिंदुस्तान’ करने का प्रस्ताव दिया था।*

*2015 में मोदी सरकार (BJP) ने किया था विरोध*

वर्ष 2015 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर हुई. इसमें देश का नाम 'इंडिया' की बजाय सिर्फ 'भारत' किए जाने की मांग की गई थी। *तब (मोदी सरकार) केंद्र ने इस याचिका का विरोध किया था* नवंबर 2015 में केंद्र सरकार ने अपना जवाब देते हुए कहा था, *देश को 'इंडिया' की बजाय 'भारत' कहने की जरूरत नहीं है*

याचिका का विरोध करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा था कि संविधान के प्रारूप के दौरान संविधान सभा में देश के नाम को लेकर लंबी बहस हो चुकी है और काफी विचार-विमर्श के बाद अनुच्छेद-1 को सर्वसम्मति से अपनाया गया था।

2016 एवं 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने 'इंडिया' का नाम बदलकर 'भारत' करने की याचिका को  दोनों बार यह पुष्टि करते हुए  खारिज कर दिया कि "भारत" और "इंडिया" दोनों का संविधान में उल्लेख है।

अंत मे संविधान में क्या लिखा है उसको भी जान लेते है :-

Article 1 Says "India, that is Bharat, shall be a Union of States." 

भारतीय संविधान के आर्टिकल 1 में लिखा है, 'इंडिया, दैट इज भारत' यूनियन ऑफ स्टेट्स.' 

इंडिया अर्थात भारत, राज्यों का एक संघ होगा

धन्यवाद🙏🙏

Dilip Kumar Udai
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सोमवार, 28 अगस्त 2023

विधायक (एमएलए) के दावेदार!!

 #TheUdai - 26
29 अगस्त 2023
✍दिलीप कुमार उदय
व्यंग्यात्मक अल्फाज प्रस्तुत है :-

विधायक (एमएलए) के दावेदार!!

कोन किस पार्टी से कर रहे है दावेदारी किसको मिलेगा टिकट आदि चर्चाओ का बाजार गर्म होने की कगार पर आ चुका है!!

विधानसभा के चुनाव की तारीख जैसे -जैसे नजदीक आ रही है वैसे वैसे विधायक बनने की तम्मना दिल मे संजोये रखने वाले एवं  राजनीति के क्षेत्र में अपना करियर चुनने एवं समाज सेवा करने की प्रबल इच्छा प्रकट करने वाले भावी विधायक एवं प्रत्याशीजनों को नमस्कार 🙏एवं अग्रिम शुभकामनाएं।😊💐

विधायक बनकर अपने क्षेत्र में विकास की गंगा बहाने का जज्बा रखने वाले ऐसे तमाम लोग विधायक बनने के प्रबल दावेदार है!! पर सोचनीय विषय यह है कि क्या दावेदार सिर्फ पूर्व विधायक, पूर्व में हारे हुए विधायक, हारे हुए पूर्व प्रत्याशी, खुद को शीर्ष नेता के दाएं हाथ- बाएं हाथ कहलवाने वाले, किसी जाति धर्म के विशेष नेता एवं स्वयंभू नेता या किसी पार्टी में विशेष पद पर विराजित लोग ही दावेदार हो सकते है?? कोई किसी पार्टी का समान्य सदस्य या आमजन यह सपना नही देख सकता ??😌😌

बेशक सपने देखने भी चाहिए और सपने को साकार करने के प्रयत्न भी करने चाहिए.......

पार्टीया टिकट नही देती है तो निर्दलीय के तोर पर भी प्रयास करने चाहिए। 

विधानसभा क्षेत्रो में जाति धर्म के बाहुल्य के तौर पर कब तक आमजन को गुमराह किया जाएगा..... फला जाति के इतने प्रतिशत वोट शेयर है तो प्रबल दावेदार फला जाति का ही होगा! यह मानसिकता आमजन के दिल दिमाग मे  बिठा दी गई है।

प्रत्याशी की योग्यता, व्यक्तित्व, संवैधानिक सोच एवं उसके विजन से ज्यादा उसकी जाति एवं उसके धर्म की बात की जाती है।

क्या किसी क्षेत्र में जाति विशेष के बाहुल्यता के अनुसार पार्टियां अपनी टिकट वितरण प्रणाली बनाती है ?? यदि ऐसा ही है तो पार्टियों में सिर्फ औपचारिकता वाली, नाममात्र वाली लोकतांत्रिक व्यवस्था है। 

क्या क्षेत्र विशेष किसी जाति धर्म की बापोती बन चुका है! साहब फला जाति के अलावा कोई नया चेहरा आ गया तो सीट तो गई ..... 

क्या पुराने चेहरों से सब खुश है!! नही तो फिर नए आने दो ना नए लोग आएंगे नया आयाम लिखेंगें, नया इतिहास बनायेंगे।

 लोगो द्वारा आम चर्चा में कहाँ जा रहा है......

अचानक से नए नए चेहरे होर्डिंग/बेनर के माध्यम से दिख रहे हैं सोशल मीडिया के द्वारा दिख रहे हैं। चुनावी मौसम आते ही बिलो से बाहर निकल रहे हैं तो भाई निकलने दो लोकतंत्र है, संवैधानिक देश है सबको हक है,अधिकार है, खुद को स्थापित करने का राजनीति में अपना दमखम दिखाने का भविष्य बनाने का...... अभी तो रेस में सब दौड़ सकते है दौड़ने दो क्या दिक्कत है। दावेदारों की बाढ़ आ रही है तो आने दो, बाढ़ नियंत्रण एवं प्रबंधन की व्यवस्था का जिम्मा पार्टियों का है वे कुशल प्रबंधन करना बखूबी जानते है।

नए चहरे तो चुनावी मौसम में ही आयेंगे , राजनीति की अखाड़े में कूदने आये तो कूदने दो जो पुराने है चुनावी मौसम से पूर्व से ही उछल कूद कर रहे है उन्होंने कोनसा तीर मार लिया ऐसी कोनसी विकास की गंगा बहा दी।

जनता को बगलाकर मुख्य मुद्दों को भटकाने के सिवा करते क्या है सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटियां अलग अलग चूल्हों पर सेकते रहते है।

नया जमाना है नई सोच है तो नया सोचिए नया जरूर मिलेगा!

दावेदार युवा हो या वरिष्ठ, सोच नई होनी चाहिए, नई सोच होगी तो बेशक मजेदार और लाजवाब होगी।

अंततः यही कहूंगा जिसने पिछले 5 सालों में क्षेत्र में रहकर समाज सेवा में अग्रणी रहकर खून पसीना बहाया हो तन मन धन से समाज सेवा की हो वो प्रबल दावेदार होगा..... बिल्कुल नही जी......😉🤨🤨

पार्टियों में दावेदार वो होगा जो हाईकमान की नजर में प्रचंड वोट से जीत हासिल करने हेतु सारे साम दाम दंड भेद में निपुण हो ऐसे महानुभाव को आशीर्वाद प्रदान किया जायेगा।

इसलिए कभी कभी चुनावी मौसम के दिनों में बिल से निकलने वाले नए चेहरे भी सितम ढा सकते हैं।

उक्त लेख में प्रयुक्त विचार मेरे निजी है।

लेख पर प्रतिक्रिया दीजिये, लाइक एवं शेयर भी कीजिये।

धन्यवाद🙏🙏
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शुक्रवार, 18 नवंबर 2022

दिशा सूचक बोर्ड बन गए है- नेता सूचक बोर्ड

 #The Udai - 25
18 नवंबर 2022

✍️दिलीप कुमार उदय

व्यंग्यात्मक अल्फाज प्रस्तुत है :-

दिशा सूचक बोर्ड बन गए है- नेता सूचक  बोर्ड

(पुष्कर - 0 KM, जयपुर - 145 KM, ब्रह्मा मंदिर ---->> )  इस तरह से लिखे हुए दिशा सूचक बोर्ड पुष्कर के प्रमुख मार्गो पर स्थित है।

पुष्कर एक धार्मिक एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है जो सभी को विदित है सभी भली भांति जानते है परंतु यहाँ पर सभी प्रमुख मार्गों पर लगे हुए दिशा सूचक बोर्ड पर आए दिन बेनर, होर्डिंग्स टंगे रहते है उसी संदर्भ में लेख प्रस्तुत है:-

अमूमन पूरे देश में नेशनल, स्टेट हाइवे रोड पर शहर -कस्बो एवं  गांवों में दिशा सूचक बोर्ड लगे हुए होते है जो सभी आमजन , राजनेताओ एवं रसूखदारों को पता है। यह दिशा सूचक आमजन हो यात्रीगण हो सभी को गंतव्य स्थान तक पहुँचने के लिए मददगार साबित होते है क्योकि इनपर विभिन्न स्थानों के मार्गों की दूरी आदि की जानकारी अंकित होती है। 

तकनीक के इस दौर में इलेक्ट्रॉनिक गेजर्ट्स स्मार्ट यूज़र्स गूगल मैप जैसी एप्लिकेशन से भी गंतव्य स्थान तक पहुँच जाते है।

 राजस्थान सरकार की राजधारा एप्लिकेशन से भी सरकारी विभाग- कार्यालय एवं आमजन की सुविधार्थ  एवं आवश्यक सेवाओं के महत्वपूर्ण स्थानों को इस ऐप के माध्यम से ढूंढा जा सकता है।

तकनीक के इस दौर की बात ही निराली है, तकनीकी ज्ञान में हर कोई निपुण नही है, इसलिए राज्य एवं स्थानीय सरकारों द्वारा लगाए गए दिशा सूचक बोर्ड आजकल नेता सूचक एवं रसूकदार सूचक बोर्ड बनकर रह गए है 

आये दिन किसी न किसी पार्टी विशेष नेताओ के या रसूकदार लोगो द्वारा स्वयं एवं पार्टी प्रचार प्रसार हेतु या फिर जन्मदिवस के स्वागत सत्कार, विशेष पर्व आदि आदि.... की शुभकामनाएं प्रेषित करने हेतु बड़े बड़े होर्डिंग्स ,बेनर को दिशा सूचक बोर्ड पर टांग दिया जाता है जब तक तेज हवाओं का दौरे शुरू नही होता या फिर होर्डिंग्स फट नही जाता या

कोई नया बेनर नही लगा दिया जाता तब तक होर्डिंग्स या बेनर दिशा सूचक बोर्ड पर सजा रहता है!

निजी वाहन से लेकर यात्री वाहन, ट्रांसपोर्ट वाहन आदि से यात्री या आमजन की नजरें दिशा सूचक बोर्ड ढूंढती रहती है जब दिशा सूचक बोर्ड नजर आता है तब उसपे गंतव्य स्थान या मार्ग दूरी नजर नही आती है नजर आती है फलाने नेता या फलाने रसूकदार द्वारा हमारे शहर कस्बे में आपका स्वागत अभिनन्दन है। स्थान की जगह या मार्ग का तो पता नही पर यात्री को नेता या रसूकदार लोगो के  नाम जरूर पता चल जाते है। 

दिशा सूचक बोर्ड के साथ साथ पुष्कर में प्रवेश करते ही महात्मा गांधी सर्किल भी आये दिन नेता स्वागत सर्किल बन जाता है। महात्मा गांधी जी तो सर्किल में नजर ही नही आते क्योकि गांधी जी की प्रतिमा के बिल्कुल सामने बेनर लगा दिया जाता है। गांधी जी तो नजर नही आते है नजर आते है मुस्कुराते हुए नेताजी, फलाने जी, रसूकदार जी के बड़े बडे होर्डिंग्स एवं बेनर। 

पता नही क्यो विज्ञापन हेतु निर्धारित स्थान पर बेनर लगाने में इनको इतना परहेज क्यू रहता है! उपरोक्त बताई गई जमात को लगता है कि बेनर दिशा सूचक बोर्ड एवं गांधी सर्किल पर स्थित गांधी जी की प्रतिमा के बिल्कुल सामने लगाने से ही इनकी कद काठी लोगो को पता चलेगी। 

बेचारे कई शिर्ष नेताओ ओर रसुकदारो को तो पता ही नही की मेरा मुस्कुराता हुआ इठलाता हुवा इतराता हुवा, काले ऐनक के साथ फलाने श्रीमान के साथ दिशा सूचक बोर्ड पर कितने महीनों से टंगा हुवा है। यह टंगा हुवा बेनर आमजन को यात्रियों को कितनी तकलीफ देय पैदा कर रहा होगा इनसे अंजान है बेचारे क्या करे कार्यकर्ताओं का मित्रो का मान रखने के लिए टंगे रहते है!😊

आमजन यात्रीगण दूसरे माध्यम से पता लगाते रहते है किस स्थान तक किस मार्ग तक पहुँचे है क्योकि शहर के सभी दिशाओं में लगे दिशा सूचक बोर्ड तो नेताओ और रसूकदार के बैनरो से होर्डिंग्स से ढके हुए जो रहते है।

सोचिये -  दिशा सूचक बोर्ड जरूरी है या दिशा सूचक बोर्ड पर इन लोगो के बेनर, होर्डिंग्स जरूरी है ?? 🤨🤨

कई जगह पर दिशा सूचक बोर्ड में एक तरफ विज्ञापन हेतु जगह निर्धारित होती है और कई जगह पर नही होती है। ज्यादातर अक्सर ऐसा देखा जा सकता है कि जहाँ दिशा सूचक बोर्ड लगे हुए है उनपर विभिन्न स्थानों की दिशा एवं दूरी अंकित होती है उस दिशा सूचक बोर्ड पर अधिकांश समय बेनर ही टंगे रहते है।

बेचारे अधिकारी, कर्मचारी भी विवश है दिशा सूचक बोर्ड से बेनर हटाने का साहस कभी नही दिखाते यदि साहस दिखा दिया तो उस अधिकारी, कर्मचारी का भगवान ही मालिक है !! क्योकि पुष्कर की जनता में मौजूद राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता, रसूकदार एवं नेता स्वयं को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, उच्च अधिकारी के खासमखास दाएं- बाएं हाथ, कलाई, भुजा, हथेली, अंगुली पता नही क्या क्या समझते है 🤙🙋‍♂️☝️🫴🫲🫵 😜😎

दिशा सूचक बोर्ड पर बेनर होर्डिंग्स के मामले में विरोधी पार्टियां सदैव मित्रता का भाव रखती है इस मामले में इनके विचार बड़े नेक है!😊

उक्त लेख में प्रयुक्त विचार मेरे निजी है।

 लेख मजेदार लगा तो प्रतिक्रिया दीजिये, लाइक एवं शेयर भी कीजिए।

धन्यवाद🙏🙏

✍️

Dilip Kumar Udai
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शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2022

राजस्थान के 2022-23 बजट में पुष्कर सरोवर के लिए अलग से नही हुई बजट घोषणा !!

 #The Udai -24
25 फरवरी 2022

✍️दिलीप कुमार उदय

व्यंग्यात्मक अल्फाज प्रस्तुत है :-

*राजस्थान के 2022-23 बजट* में  पुष्कर सरोवर के लिए अलग से नही हुई बजट घोषणा !!

*अलग से बजट घोषणा नही हुई तो क्या पुष्कर सरोवर का विकास रुक जायेगा समस्याओं का निवारण नही होगा???*

*सत्ता पक्ष के एवं विपक्ष के नेता पुष्कर सरोवर के इर्द गिर्द परिक्रमा करते रहते है इनकी परिक्रमा पिछले कई सालों से पूरी नही हो पा रही है !*

*पूर्व शिक्षा मंत्री नसीम मेडम पुष्कर को लेकर सदैव चिंतित रहती है* इनका चिंतित रहना स्वाभाविक भी है पुष्करराज एवं जनता के आशीर्वाद से विधायक रहते हुये शिक्षा मंत्री का पदभार मिला था। *वो अलग बात है कि पिछले 2 चुनावो में जनता का आशीर्वाद नही मिल पाया परन्तु पुष्करराज का आशीर्वाद बरकरार रहा जिसके तहत वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी में उपाध्यक्ष पद पर है।* खेर लोकतंत्र में किसी को जीत और किसी को हार नसीब होनी है।

 मेडम ने अपने अथक  प्रयास से सरोवर के लिए मीटिंग्स आयोजित की डीपीआर को बजट में शामिल करवाने हेतु जद्दोजहद भी की, जब बजट में डीपीआर शामिल नही हुई तो *ठीकरा अधिकारियों के माथे डाल दिया गया। अधिकारियों को दोषी करार देकर उन्हें लापरवाह घोषित करते हुए कार्यवाही की मांग तक कर डाली है।* पुष्कर सरोवर के लिए बजट घोषणा नही होने पर CM को पत्र भी लिख दिया है। *पुष्कर सरोवर बजट को लेकर अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर चेन से नही बैठूंगी वाला दांव भी लगा दिया है.....अब देखो यह दांव कितना कारगर सिद्ध होता है!!*

🤔सोचनीय विषय यह है कि पुष्कर सरोवर में बरसाती गंदे पानी वाली समस्या तो सालो से है। *राजस्थान का बजट अचानक तो घोषित हुवा नही, तय समयावधि में ही बजट आता है तो उसके अनुसार पूर्व में  तैयारी कर लेनी चाहिए थी इतनी ढिलाई क्यो बरती गई ??*🤔🤔

*वैसे प्रतिष्ठा का दांव तो वर्तमान विधायक श्री सुरेश रावत को भी लगाना चाहिए उन्हें जनता ने 2 बार चुना है आगामी चुनाव तक 10 वर्ष पूरे भी हो जायेंगे। उन्होंने हजारो करोड़ रुपये के विकास कार्य करवाये थे तो पुष्कर सरोवर विकास ओर बरसाती पानी के साथ गंदे पानी की समस्या अछूती कैसे रह गई , इनके पूर्व कार्यकाल के समय केंद्र, राज्य, सांसद एवं विधायक सभी एक पार्टी से थे पूरी चेन थी फिर भी समस्या जस की तस कैसे रह गई। यह जनता हेतु गहन अध्ययन का विषय है।*😉😉

इन्होंने डीपीआर (Detailed Project Report) मामले को लेकर कहां था कि यह राशि *ऊंट के मुंह मे जीरा है, माना कि जीरा है आप आपके विधायक कोष से एवं आपकी पार्टी के सांसद कोष से या केंद्र द्वारा ऊंट के मुंह मे राई* जितना ही कर दिखा दीजिये ना  😊😊

*पुष्कर सरोवर के बरसाती पानी के साथ गंदे पानी वाली समस्या का निवारण बहुत आवश्यक है इसका समाधान सर्वप्रथम होना जरूरी है।* 

🙏🙏

राजस्थान बजट में पर्यटन को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणाएं हुई है जिन्हें जानना भी जरूरी है :- 

*पुष्कर धार्मिक नगरी के साथ साथ अंतराष्ट्रीय पर्यटन स्थल भी है। राजस्थान के प्रमुख पर्यटक स्थलो में पुष्कर का महत्व क्या है सर्वविदित है।*

*पर्यटन, कला एवं संस्कृति* और *आधारभूत संरचना* के तहत *सड़क एवं सुनियोजित विकास हेतु स्वीकृत बजट से भी पुष्कर की कायापलट हो सकती है !!*  

*पर्यटन :-* इस बजट में *1 हजार करोड़* का पर्यटन विकास कोष बनाया गया है।

 *400 करोड़ रुपये प्रदेश की Tourism Destination के रूप में Branding करने, जिसमे Media Plan, Events, Concerts आदि शामिल होंगे*

 तथा *600 करोड़ रुपये पर्यटन स्थलों/ सर्किट से संबंधी आधारभूत संरचना के कार्यो के लिए खर्च किए जायेंगे।*

*साथ ही प्रत्येक जिले में 2-2 पर्यटक स्थलों को चिन्हित कर जन सुविधा संबंधी 100 करोड रुपए के कार्य आगामी वर्ष हाथ में लिए जाना प्रस्तावित है।*

*साहसिक पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एडवेंचर टूरिज्म प्रमोशन स्कीम लाई जायेगी* 

*पर्यटकों को सुविधा उपलब्ध कराने की दृष्टि से 10 करोड रुपए की लागत से एकीकृत ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल मोबाइल एप्स विकसित किए जाएंगे।*

*पर्यटकों की सहायता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों हेतु 500 पर्यटक मित्र भर्ती किये जायेंगे।*

*आधारभूत संरचना के तहत* :-

नाथद्वारा -राजसमंद, *पुष्कर- अजमेर*, पिलानी -झुंझुनू ,एवं माउंट आबू -सिरोही में  *₹160 करोड़* की लागत से सौंदर्यीकरण अन्य आधारभूत कार्य करवाये जायेंगे।

*(160 करोड़ में से पुष्कर हेतु कितने करोड़ का सौंदर्यीकरण  होगा ??)*

*राजस्थान के बजट में पर्यटन को खासा महत्व दिया गया है उस लिहाज से देखा जाए तो पुष्कर के विकास को पंख लगने चाहिए!!*

 *राजनीति महत्वकांशा एवं गुटबाजी पंख को कतरने का प्रयास न करे तो विकास नामी पंख की उड़ान पुष्कर के लिए शानदार हो सकती है।*

*कांग्रेस की आपसी गुटबाजी के  एवं राजनीतिक वर्चस्व की उठापटक के कारण पुष्कर में नवीन 100 बेड के हॉस्पिटल की राजनीति देख चुके है। हॉस्पिटल मुद्दा अभी शांत है, अभी सरोवर मुद्दे का शोर है राजनेता शोर मचाकर जनता को गुमराह करने में माहिर होते है जनता समझ ही नही पाती आखिर राजनेता चाहते क्या है।*

खेर वर्तमान मुद्दे की बात की जाए *राजनीतिक प्रतिष्ठा किसकी बरकरार रहती है यह आगामी समय ही बताएगा क्योकि पर्यटन के लिहाज से पुष्कर का पर्यटक की दृष्टि से विकास अब RTDC चेयरमैन धर्मेंद्र सिंह राठौड़ के हाथों में भी आ गया है।* आगामी विधानसभा चुनाव से पहले RTDC चेयरमैन पुष्कर की काया पलटने में कितनी रुचि रखते है और रुचि धरातल पर कब आएगी यह तो आने वाला समय ही बता पायेगा।

*पर्यटन विकास कोष से या अन्य विकास कोष से पुष्कर सरोवर हेतु भरपूर आवश्यक पूरा कोष या ऊंट के मुंह में जीरा जितना या ऊंट के मुंह में राई जितना कितना कोष मिलता यह देखना बड़ा दिलचस्प होगा।*🤨🤨

स्थानीय निकाय, अजमेर विकास प्राधिकरण, पर्यटन विभाग, संबंधित अन्य विभाग  एवं राजनेता सब मिलकर पुष्कर की काया पलट सकते है!! यदि इनकी इच्छाशक्ति प्रबल रूप से कार्य करे तो।

राजस्थान बजट की पूरे देश मे विपक्ष को छोड़कर सभी तारीफ कर रहे है और *पुष्कर में बजट को लेकर राजनीति वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई जिसे मीडिया बड़े मजे से भुना रहा है*😊😊

लेख में प्रयुक्त विचार मेरे निजी है।

धन्यवाद🙏🙏


✍️ Dilip Kumar Udai 
*B.J., B.A., M.A.*
Independent Journalist,
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गुरुवार, 24 फ़रवरी 2022

 #The Udai -23

24 फरवरी 2022

✍️दिलीप कुमार उदय

 

राजस्थान के बजट की पूरे देश में चर्चा 

विपक्ष को नहीं भाया बजट

बजट को लेकर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया का विवादित बयान भी सुर्खियों में


राज्य बजट के राजकोषीय संकेतक :-

👉 वर्ष 2022-23 के बजट अनुमानों में ₹ 2 लाख 14 हजार 977 करोड़ 23 लाख की राजस्व प्राप्तियां

👉 वर्ष 2022-23 के बजट अनुमानों में ₹2 लाख 38 हजार 465 करोड़ 79 लाख का राजस्व व्यय

👉 वर्ष 2022-23 के बजट अनुमानों में राजस्व घाटा ₹ 23 हजार 488 करोड़ 56 लाख

👉 वर्ष 2022-23 का राजकोषीय घाटा ₹ 58 हजार 211 करोड़ 55 लाख जो GSDP का 4.36 प्रतिशत है

सर्वाधिक चर्चा के मुख्य बिंदु :-

👉 राज्य का प्रथम कृषि बजट

👉 "सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल

👉 चिरंजीवी योजना में पंजीकृत 1.33 करोड़ महिलाओं को मुफ्त मोबाइल साथ मे डेटा भी

👉 1 लाख युवाओं को रोजगार

👉 समस्त 118 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को राहत-100 यूनिट तक प्रतिमाह उपभोग करने वालों को 50 यूनिट बिजली निःशुल्क, 150 यूनिट तक 3 रुपये प्रति यूनिट का अनुदान तथा 150 से 300 यूनिट तक के उपभोग पर 2 रुपये प्रति यूनिट अनुदान

👉 चिरंजीवी योजना में  प्रति परिवार 10 लाख रुपये का सालाना चिकित्सा बीमा (पहले 5 लाख था अब 10 लाख) साथ ही 5 लाख का निःशुल्क दुर्घटना बीमा कवर भी। सभी श्रेणी के राजकीय चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध Outdoor (OPD) एवं Indoor (IPD) सुविधाएं समस्त प्रदेशवासियों के लिए पूर्णतः निःशुल्क

 👉 टूरिज्म को इंडस्ट्री का दर्जा एवं राजस्थान रूरल टूरिज्म स्कीम, ₹ 1000 करोड़  का पर्यटन विकास कोष

राजस्थान के मुख्यमंत्री ने राज्य का सालाना बजट पेश किया सरकार के समर्थक बजट को बेहतरीन बताकर प्रशंसा कर रहे हैं वही विपक्ष में बैठे लोग विरोध करते हुए जनता से छलावा बता रहे है उसी कड़ी में अब विवादित बयान का जिक्र कर लेते है:-

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा वर्ष 2022-23 के लिए बजट पेश करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए BJP के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पुनिया ने कहा था कि यह बजट लीपापोती वाला बजट है ऐसा लग रहा है कि किसी काली दुल्हन को ब्यूटीपार्लर में ले जाकर उसका अच्छे से शृंगार करके पेश कर दिया गया हो इससे ज्यादा इस बजट में मुझे कुछ नहीं लगता.....

उक्त अटपटे विवादित बयान के बाद कांग्रेस के निशाने पर आ गए पुनिया :- कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने विवादित बयान  को अभद्र और गैरजिम्मेदाराना बताया है और कहां की ऐसी टिप्पणियों से न सिर्फ महिलाओं का अपमान किया है, बल्कि महिलाओं की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है।

कांग्रेस की महिला इकाई ने भी राजस्थान के वार्षिक बजट पर BJP के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया की कथित विवादित टिप्पणी को लेकर आरोप लगाया है कि महिला विरोधी मानसिकता भाजपा के डीएनए में है।

काली दुल्हन वाले विवादित बयान से चौतरफा घिरने के बाद पुनिया ने माफी मांगी

बोले मेरे कहे शब्दो से किसी को ठेस लगी हो भावनाएं आहत हुई तो मैं क्षमा प्रार्थी हूं।

राज्य महिला आयोग अध्यक्ष रेहाना रियाज चिश्ती ने कहा कि पुनिया की टिप्पणी नस्लभेदी एवं अपमानजनक है, पुनिया के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने हेतु विधानसभा अध्यक्ष को भेजा जाएगा नोटिस ......

उक्त विवाद से राजस्थान का सियासी माहौल हुवा गर्म

 मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी द्वारा बजट भाषण में प्रस्तुत कुछ पंक्तियाँ जो हर व्यक्तित्व को निर्देशित करती है ब्लॉग के द्वारा आपके समक्ष प्रस्तुत है :-

🌻 "युवा पीढ़ी सिंह की भांति सभी समस्याओं से लड़ सकती है।

🌻 "न थके अभी पैर, ना अभी हिम्मत हारी है। हौसला है जिंदगी में कुछ कर दिखाने का, इस लिए अभी भी सफर जारी है।।

🌻 'अपने पैसे पर भरोसा मत करो बल्कि अपने पैसे को भरोसे में रखो ' 

🌻 ना पूछो मेरी मंजिल कहाँ है, अभी तो सफर का इरादा किया है। ना हारूंगा हौसला उम्र भर, ये मैंने किसी से नहीं खुद से वादा किया है।।


धन्यवाद।🙏

✍️

Dilip Kumar Udai 

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सोमवार, 16 अगस्त 2021

पुष्कर में कांग्रेस पार्टी का दंगल

 #The Udai -21

16 अगस्त 2021
*पुष्कर में कांग्रेस पार्टी का दंगल*
पर व्यंग्यात्मक अल्फाज प्रस्तुत है।
दिलीप कुमार उदय ✍️
*15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व के दिन सांय 4:00 बजे से ही कांग्रेस के अलग अलग कुनबे युवा काँग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री निवासन बी.वी. जी के पुष्कर आगमन पर उनके स्वागत सत्कार के लिए अलग अलग स्थान पर एकत्रित हो रखे थे। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष दामोदर जी शर्मा एवं उनका कुनबा ब्रह्मा मंदिर के पास इन्तेजार कर रहा था तो पूर्व मंत्री नसीम जी अख्तर एवं इंसाफ अली के कुनबे ने प्रेम प्रकाश आश्रम में स्वागत सत्कार के आयोजन हेतु जाजम बिछा रखी थी। ब्रह्मा मंदिर के पास दामोदर जी शर्मा के कुनबे वाले पुष्कर कस्बे के सेकड़ो समर्थक एकत्रित होने की खबर जैसे ही इंसाफ कुनबे को लगी तुरन्त आनन फानन में प्रेमप्रकाश आश्रम पर एकत्रित पुष्कर विधानसभा क्षेत्र से एवं बाहर से आये एवं कुछ स्थानीय समर्थक ब्रह्मा मंदिर पहुंच गये।*
*युवा काँग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री निवासन बी.वी. जी के ब्रह्मा मंदिर पहुँचने से 5 मिनिट पूर्व ही दोनों कुनबे में हो गया जोर आजमाइश वाला दंगल*! जिसमे धमाचौकड़ी मच गई कोई *बीच बचाव कर रहा था तो कोई आवेश में आकर शब्दों के वाण छोड़ रहा था तो कोई हाथों से कोई पैरो से पराक्रम दिखा रहा था यह दंगल मीडियाकर्मियों ने एवं अन्य लोगो ने अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया है। पुष्करवासी एवं पुष्कर की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोग बार बार वीडियो देखकर अपने अपने कयास लगा रहे है की कौन किस पर भारी पड़ा।*
युवा काँग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री निवासन बी.वी. जी को दामोदर जी शर्मा एवं उनके समर्थकों ने ब्रह्मा मंदिर स्वागत के समय एवं प्रेम प्रकाश आश्रम के बाहर.... *अवगत कराकर गंभीर आरोप लगाये कि पुष्कर में पूर्व मंत्री नसीम अख्तर एवं इनके शौहर इंसाफ अली ने कांग्रेस पार्टी को कमजोर करने,कांग्रेस में गुटबाजी पैदा करने और पुष्कर नगर पालिका बोर्ड में कांग्रेस को हराने जैसे गंभीर आरोप लगाकर कहां की हमारे साथ नगर कांग्रेस अध्यक्ष, सेवादल, पुष्कर युवा कांग्रेस अध्यक्ष, कांग्रेस पार्षद एवं पुष्कर के सेकड़ो कांग्रेस कार्यकर्ता एवं संगठन हमारे साथ है फिर भी हमे तवज्जो न देकर अख्तर दंपति अपनी मनमर्जी करते है और कांग्रेस को कमजोर करने में लगे है। कांग्रेस पार्टी सम्बंधित पुष्कर नगर कांग्रेस संगठन को किसी भी प्रकार की जानकारी नही दी जाती है।*
*दूसरी और अख्तर दम्पति ने इन सबकी परवाह न करते हुए प्रेम प्रकाश आश्रम पुष्कर में पुष्कर विधानसभा क्षेत्र से आये समर्थकों एवं टीम नसीम अख्तर पुष्कर के कुनबे के साथ युवा काँग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री निवासन बी.वी. जी, एवं रिजू झुनझुनवाला आदि का स्वागत सत्कार किया एवं वार्तालाप करके खुद के कुनबे को सर्वश्रेष्ठ बताकर यह जता दिया कि पुष्कर की राजनीति में मेरा दमखम बरकार रहेगा।*
इस दंगल में कोंन किसपे किस तरह हावी रहा यह आप सभी वीडियो क्लिप के माध्यम से तय कर सकते है। वैसे दोनों कुनबे अपने आप को गोल्ड मैडल से नवाज कर अगले दंगल की तैयारी में जुट गए है।
इस दंगल की आग कबसे ही एक दूसरे के खिलाफ सुलग रही थी शायद इन्तेजार था किसी *राष्ट्रीय बड़े नेता के पुष्कर आगमन का सुलगती आग में चिंगारी भड़की और शोले में तब्दील हो गई।*
*वैसे उक्त घटना का मूल कारण अलग अलग गुट के स्वागत के दौरान नसीम कुनबा जबरन दामोदर शर्मा के कुनबे की तरफ आकर पहले स्वागत करने का प्रयास करना चाहते थे इस कारण से दंगल मच गया।*
*पुष्कर की राजनिति में शतरंज की बिसात बिछाकर शह मात के खेल में दोनों गुटों के दिग्गज एवं अन्य कई बड़े नेता बहुत माहिर और शातिर है।*
*खेर राजनीतिक उठापठक का गणित और शतरंज की बिसात के अपने अपने मायने है वैसे नुकसान सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस पार्टी और कार्यकर्ताओं का ही है। विपक्ष मुस्कुराते हुए इठलाते हुए आनंद ले रहा है।*
वैसे सोशल मीडिया में उक्त घटना से जुड़े वीडियो क्लिप न्यूज़ आदि से उक्त घटना कि खबर प्रदेश भर में फेल गई है। *15 अगस्त के अवकाश के कारण प्रिंट मीडिया में खबर 17 अगस्त को प्रकाशित होगी, प्रिंट मीडिया उक्त घटना को किस करवट बिठाता है?? यह भी मजेदार होगा क्योकि मामला प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष, पूर्व मंत्री एवं पायलट समर्थक बनाम प्रदेश मुख्यमंत्री समर्थक से भी जुड़ा है।*
लेख में विचार मेरे व्यक्तिगत है।
धन्यवाद🙏🙏
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Dilip Kumar Udai
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✍️ दिलीप कुमार उदय – ब्लॉग 36   दिनांक: 28 जनवरी 2026 UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 कानून क्य...